क्या आपको पता है कि आपके और आपकी कामयाबी के बीच सिर्फ एक ही चीज है और ये वही चीज है जो महाभारत के युद्ध अर्जुन और अर्जुन के बीच में थी। चलिए भगवद गीता का अध्याय 1 शुरू करते है।
पिछली वीडियो में आपको बताया था कि अर्जुन कुरुक्षेत्र के मैदान के बीचों बीच पहुंच कर दोनो तरफ की सेनाओं में अपने लोग देखने के बाद अपना धनुष बाण कंधे से उतार कर रथ में बैठ गए थे।
भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से इसका कारण पूछा तो अर्जुन ने बताया कि दुश्मन सेना में मेरे पितामह और मेरे सबसे प्रिय गुरु द्रोण है जिन्होंने मुझे धनुष पकड़ना सिखाया आज मैं इन पर कैसे बाण चला सकता हूं।
लगभग यही स्थिति हमारे साथ होती है, वैसे तो किसी भी स्थति के इस परिस्थिति कों जोडा जा सकता है। आपके घर से या आपके ऑफिस से , लेकिन मैं इसे आपके ऑफिस से जोड़ता हूं जिससे समझने और समझाने में आसानी होगी।
जब आपके ऑफिस में प्रमोशन को लेकर विवाद हुआ तो आप देखते है कि जिसने आपको ऑफिस में ज्वाइन करवाया था और जिसके under में आपने ट्रेनिंग ली थी दोनो लोग किसी परिस्थिति वश वो लोग विरोधी खेमे में है।
भले ही अर्जुन की दुश्मन सेना में 3 महावीर भीष्म द्रोण और उनका पुत्र अस्वथामा लगभग अमर थे, अर्जुन के समान धनुर्धर कर्ण था, गदाधारी दुर्योधन था, इसके बावजूद खुद अर्जुन भीं जानते थे कि उसकी तीरों का मुकाबला कोई नही कर सकता है। फिर भी मोह में फंस कर वो जीतने के लिए आगे नहीं बढ़ रहे थे।
आपके साथ भी ऐसा होता है आपको पता है कि आपकी प्रतिभा और ज्ञान के सामने कोई टिक नही पाएगा लेकिन मोह में फंस कर आप प्रमोशन नहीं मांगते।
तो देखा आपने अर्जुन की तरह आपकी और आपकी कामयाबी के।बीच एक मात्र चीज है और वह हैं मोह। मोह कई तरह का होता है जैसे
1. अपने जनों का मोह जिसके कारण आप अपने घर को छोड़ नहीं पाते।
2. आलस्य से मोह जिसके कारण आप परिश्रम नहींकर।पाते है।
3. अपनो के नाराज होने का मोह
4. नशीले पदार्थो के सेवन का मोह
5. नींद से मोह जिस कारण आप सुबह लेट उठते है।
अर्जुन की तरह सफलता पाने के लिए आपको भी अपने सभी मोह को त्यागना होगा।
इसके बारे में आगे के वीडियो में बात करेंगे।