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जीवन साथी का हमारे जीवन में क्या महत्व इस बारे में किसी को कुछ भी बताना व्यर्थ है। हम सभी अच्छे जीवन साथी के महत्व को जानते है। सावित्री जैसी पत्नी यमराज के चंगुल से भी अपने पति को मुक्त करवा सकती है। इसीलिए साथियों आज हम चर्चा करेंगे कि चाणक्य नीति में आदर्श पत्नी की क्या क्या विशेषता बताई है। चलिए आज इसी विषय पर चर्चा प्रारंभ करते है।
इस संसार में ज्यादातर लोग दुखी है। चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य में दुखी व्यक्तियों के लिए शांति का उपाय बताया है।
चाणक्य नीति के अध्याय 4 श्लोक 10 के अनुसार इस संसार में दुखी लोगो को तीन बातो से ही शांति हो सकती है—अच्छी संतान, पतिव्रता पत्नी और सज्जन का संग।
अर्थात चाणक्य नीति के अनुसार 3 चीजे दुखी जीवन को सुख प्रदान कर सकती है। वह है अच्छी।संतान, पतिव्रता पत्नी और सज्जन लोगो का संग।
अन्य बातो के बारे में चर्चा हम दूसरे वीडियो में करेंगे आज हम पतिव्रता पत्नी के बारे में बात करेंगे। पतिव्रता पत्नी का जीवन पति के जीवन कों सवर्ग बना देती है और दुष्ट स्त्री पति के जीवन को नर्क बना देती है। यह बात चाणक्य नीति के इस श्लोक से स्पष्ट हो जाती है।
चाणक्य नीति के अध्याय 6 श्लोक 12 के अनुसार बुरे राज्य की अपेक्षा किसी प्रकार का राज्य न होना अच्छा है। दुष्ट मित्र के अपेक्षा मित्र न होना अच्छा है। दुष्ट शिष्यों की अपेक्षा शिष्य न होना अच्छा है। और दुष्ट पत्नी का पति होने से अच्छा है पत्नी ही न हो।
अर्थात व्यक्ति का दुष्ट पत्नी से विवाह करने से अच्छा है कि।व्यक्ति आजीवन कुंवारा ही रहे है। या दुर्भाग्य वश किसी व्यक्ति का विवाह दुष्ट जीवन साथी से हो जाता है तो दुष्ट जीवन साथी का साथ छोड़ देना चाहिए। क्योंकि अच्छा जीवन साथी ही आपका सच्चा मित्र होता है।
चाणक्य नीति के अध्याय 5 श्लोक 15 के अनुसार विदेश में विद्या ही मनुष्य की सबसे सच्ची मित्र होती है। घर में अच्छे स्वभाव वाली और गुणवती पत्नी ही मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती है। रोगी व्यक्ति की दवाई मित्र है और जो मनुष्य मर गया होता है धर्म कर्म ही उसका मित्र होता है।
जैसा कि इस श्लोक में बताया है कि कब और कौन अच्छा मित्र होता है
विदेश में विद्या ही मनुष्य की सबसे सच्ची मित्र होती है।
घर में अच्छे स्वभाव वाली और गुणवती पत्नी ही मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती है।
रोगी व्यक्ति की दवाई मित्र है
और जो मनुष्य मर गया होता है धर्म कर्म ही उसका मित्र होता है।
बाकि।बातो।की बात हम अन्य वीडियो में।करेंगे आज हम अच्छे स्वभाव और गुणवती पत्नी के बारे में बात करेंगे। अच्छे स्वभाव वाली और गुणों।से युक्त पत्नी ही व्यक्ति की सबसे अच्छी।मित्र होती है। आइए बात करते है कि चाणक्य नीति में अच्छे स्वभाव और गुणवान पत्नी के बारे में।क्या बताया।गया है।
चाणक्य नीति के अध्याय 4 श्लोक 13 के अनुसार पति के लिए वही पत्नी उपयुक्त होती है, जो मन, वचन और कर्म से एक जैसी हो और अपने कार्यों में निपुण हो, इसके साथ ही वह अपने पति से प्रेम रखने वाली तथा सत्य बोलने वाली होनी चाहिए ऐसी स्त्री को ही श्रेष्ठ पत्नी माना जा सकता है।
अर्थात चाणक्य नीति की अनुसार एक आदर्श पत्नी में ये गुण होने चाहिए
मन कर्म और वचन में एकरूपता - अर्थात आदर्श पत्नी जैसा सोचे वैसा बोले और उसी के अनुसार अपने कर्म करने चाहिए। पत्नी के कर्म परिवार की उन्नति करने वाले होने चाहिए।
कार्य में निपुण- आदर्श पत्नी अपने कार्य में निपुण होनी चाहिए। एक पत्नी को अनेकों।कार्य करने होते है वह एक अच्छे कुक से लेकर एक अच्छी अध्यापिका तक बहुत सारे कार्य कार्य करने होते है। आदर्श पत्नी को चाहिए की वह सभी कार्यों में निपुणता प्राप्त कर ले। और अपनी कार्य कुशलता से अपने परिवार को।प्रसन्न कर दे।
पति से प्रेम - प्रेम पति और पत्नी के रिश्ते के बीच मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करता है। अक्सर प्रेम ही पति और पत्नी के बीच में तलाक का कारण बनता है। इसीलिए पत्नी।को चाहिए कि वह अपने प्रेम से अपने पति को संतुष्ट कर दे।
सत्य वचन - आदर्श पत्नी को कभीं झूठ नही बोलना चाहिए। क्योंकि झूठ जब पकड़ा जाता है तो पति पत्नी के रिश्ते को कमजोर कर देता है। आदर्श पत्नी को चाहिए कि वह अपने पति से सदा सत्य बोले।