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सफल जीवन के लिए इन 5 बातो।के बारे में हमेशा सोचते रहना चाहिए




नमस्कार साथियों, आपका स्वागत है आपके अपने चैनल life Lessons by guruji में। इस चैनल पर मिलने वाले ज्ञान के माध्यम से आप अपने जीवन यात्रा को सफल और सुगम बना सकते है। क्योंकि इस चैनल पर हम अपने जीवन को सफल और सुगम बनाने वाले विषय पर चर्चा करते है और यह सीखते है कि चर्चा करने वाले विषय को कैसे अपने जीवन में सामिल कर सकते है

 साथियों आज हम चर्चा करेंगे कि चाणक्य नीति के अनुसार समझदार व्यक्ति को किन 5 बातों के बारे में निरंतर सोचते रहना चाहिए। ताकि समझदार व्यक्ति अपनी वास्तविक स्थिति जानकर उस पर विचार करे और उनका सुधार कर अपने जीवन में सफल हो जाए। 

साथियों हमारे चैनल पर आपको आचार्य चाणक्य द्वारा लिखी किताब की यथार्थ और सत्य जानकारी दी जाती है। हम भड़काऊ थंबनेल और टाइटल का इस्तेमाल कर व्यूज पाने की कोशिश नही करते। बल्कि ये चीजें  हमे महान चाणक्य का अपमान लगती है। क्योंकि ये चीजें महान चाणक्य के व्यक्तिव और आदर्शो से मेल नहीं खाती।  

हमने चाणक्य नीति की बहुत सी वीडियो बनाई है अगर आपने वीडियो नही देखी है तो डिस्क्रिप्शन बॉक्स में चाणक्य नीति प्लेलिस्ट का लिंक है। उससे आप चाणक्य नीति की अन्य दूसरी वीडियो को देख सकते है।

साथियों अपने विषय पर वापस लौटते है और आज की चर्चा प्रारंभ करते है। 

 आचार्य ने बताया है कि समझदार व्यक्ति हमेशा अपनी कमजोरियों को जानकर निरंतर सुधार करने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए उसे हमेशा इन 5 बातों को निरंतर सोचते रहना चाहिए



Ka : kala:, kani mitrani, ko desh: kau vyaya gamau,. 
Kashan aham, ka ch me, shakti riti chintyam muhur muhu,

चाणक्य नीति के अध्याय 4 श्लोक 18 समझदार व्यक्ति को चाहिए कि वह इन बातों के संबंध में सदैव सोचता रहे जैसे कि मेरा समय कैसा है?  मेरे मित्र कितने हैं? मैं जिस स्थान पर रहता हूं वह स्थान कैसा है? मेरी आय और व्यय कितना है? मैं कौन हूं? मेरी शक्ति क्या है? अर्थात मैं इस कार्य को करने में समर्थ हूं कि नहीं।

अर्थात चाणक्य कहते है व्यक्ति को इन 5 बातों पर निरंतर विचार करना चाहिए।

समय - अर्थात व्यक्ति को हमेशा विचार करने रहना चाहिए कि उसका वर्तमान समय अच्छा चल रहा है कि बुरा। अगर व्यक्ति को लगे की उसका समय बुरा चल रहा है तो धैर्य और युक्ति से बुरे समय को अच्छे समय में बदलना चाहिए।

मित्र - कहा जाता है हम उन 5 मित्रो के औसत है जो हमारे साथ अधिक समय तक रहते है। अर्थात अगर हम बुरे मित्रो के साथ रहेंगे तो हम बुरे व्यक्ति बनेंगे। और अगर अच्छे मित्रो के साथ रहेंगे तो अच्छे व्यक्ति बनेंगे। इसीलिए समझदार व्यक्तिं को हमेशा विचार करते रहना चाहिए कि उसके मित्र अच्छे है या बुरे।

स्थान - अच्छे स्थान का हमारे जीवन पर क्या असर पड़ता है इसपर मैं ( वीडियो बना चुका हू अगर नही देखा तो डिस्क्रिप्शन बॉक्स में चाणक्य नीति प्लेलिस्ट का लिंक है वहा जाकर उस वीडियो को देख सकते है इसके अलावा मैं चाणक्य नीति प्लेलिस्ट का लिंक end screen पर दे दूंगा। इस विडियो के बाद देख लीजिएगा बहुत उपयोगी वीडियो है।

आय और व्यय - संतोष जनक आय और सुनियोजित व्यय हमारे पूरे जीवन यात्रा को सुगम और सुखमय कर सकते है। इसीलिए समझदार व्यक्ति को हमेशा आय के स्रोत के बारे में सोचना चाहिए और आय को सुनियोजित और नियंत्रित तरीके से व्यय करने के बारे में सोचना चाहिए।

आय और व्यय  मेरा सबसे पसंदीदा विषय है लेकिन दुर्भाग्य से मैने इस पर ज्यादा वीडियो नही बनाई है। अकाउंट मैनेजर के पद पर रहते समय मैने इस विषय को बहुत ही गहराई से समझा है। अगर आप लोगो को आय और व्यय से संबंधित विस्तृत वीडियो देखनी हो तो कमेंट कर के अवश्य बताइएगा। ज्यादा डिमांड हुई तो इस विषय पर एक अच्छी वीडियो बनाऊंगा। please comment जरूर कीजियेगा मेरा भी वीडियो बनाने का बहुत मन है। 

शक्ति - एक समझदार व्यक्ति को हमेशा अपनी शक्तियों और कमजोरियों के बारे में सोचते रहना चाहिए। ताकि वह अपनी शक्तियों को बढ़ा सके और कमजोरियों को दूर कर सके। और जब मौका पड़े तो अपनी शक्तियों को दूसरो के सामने प्रदर्शित करे और कमजोरियों को जाहिर न होने दे।

अब आपने इन 5 बातों पर सोच विचार कर इसकी कमजोरियों को।दूर करने की योजना बनाई है लेकिन डरते है कि कही आप अपनी योजना में सफल होंगे की नही। इसके लिए 
चाणक्य नीति के श्लोक को समझते है


Ko hi bharah samarthanam, kim duram vyavsayinam, .
Ko videshah savidyanam, kah parah priyvadinam .

चाणक्य नीति के अध्याय 3 श्लोक  13 समर्थ अथवा शक्तिशाली लोगों के लिए कोई भी कार्य कठिन नहीं होता है व्यापारियों के लिए कोई भी स्थान दूर नहीं होता है पढ़े-लिखे व्यक्तियों के लिए कोई भी स्थान विदेश नहीं होता है और मधुर वासियों के लिए कोई भी पराया नहीं होता है।

अर्थात चाणक्य कहते है कि अगर आपको अपने मन की शक्ति पर विश्वास है तो कोई भी कार्य कठिन नहीं है।

समझदार व्यक्ति को चाहिए कि इन 5 बातों पर हमेशा विचार करे और अपने पर विश्वास रखते हुए अपनी कमजोरियों को दूर करे जिससे वह व्यक्ति अपने जीवन में सफल हो सकेगा।

साथियों आपने देखा कि हमारे चैनल की वीडियो आपकी सफलता में कितनी उपयोगी साबित हो सकती है इसीलिए अगर आप अपने जीवन में सफल होना चाहते है तो चैनल को सब्सक्राइब कर नोटिफिकेशन वाली घंटी को on कर दीजिए जिससे आपको हमारी वीडियो बिना किसी व्यवधान के मिलती रहे। और जिन साथियों ने चैनल को पहले से ही सब्सक्राइब कर रखा है उन्हे धन्यवाद, वो वीडियो को शेयर कर अन्य साथियों तक पहुंचाए क्योंकि ऐसा ज्ञान उन्हें यूट्यूब पर कही और नही मिलेगा।
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नमस्कार साथियों, आपका स्वागत है life Lessons के मध्यम से अपने जीवन को सफल और सुगम बनाने वाले अपने अभियान में। 

साथियों वार्तालाप की शिष्टता मानव को आदर का पात्र बनाती है मधुर वाणी सुनने वाले व्यक्ति को प्रसन्न कर देती है जिससे समाज में उस व्यक्ति की सफलता के लिए रास्ता आसान हो जाता है। जबकि कटु वाणी सुनने वाले व्यक्ति को रुष्ट कर देती है, जिससे अकारण ही उस व्यक्ति के कई शत्रु जन्म ले लेते है जो व्यक्ति की सफलता का मार्ग अवरूद्ध कर देते है। 

मधुर वाणी सुनने वाले व्यक्ति के मन से क्रोध और घृणा की भावना भी खत्म हो जाती है। छोटे से छोटे व बड़े से बड़े कार्य जो बड़े-बड़े सूरमा भी नहीं कर पाते, वे केवल वाणी के माधुर्य से संपन्न हो जाते हैं। मधुर वाणी के महत्व का सबसे बड़ा उदाहरण कोयल और कौवा हैं। दोनों का रंग काला होते हुए भी मधुर वाणी की वजह से सभी कोयल को स्नेह करते हैं, और उसे शुभ मानते हैं।

इतना महत्वपूर्ण विषय नीति शास्त्र के गुरु आचार्य चाणक्य से कैसे बचा रह सकता है। तो आइए आज की चर्चा प्रारंभ करते है। और जानते है कि आचार्य ने अपनी पुस्तक चाणक्य नीति में मधुर वाणी को लेकर कौन सी नीतियां बताई है। 


आचार्य ने अपनी पुस्तक चाणक्य नीति में बताया है कि सिर्फ मधुर वाणी से पूरे संसार को अपने वश में कर सकते है। आचार्य कहते है कि यह संसार विष से भरा है अर्थात संसार में हर जगह कड़वाहट और नफरत भरी है। मधुर वाणी से संसार में फैली नफरत को बहुत कम कर लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर सकते है। 

चाणक्य नीति की अध्याय 16 श्लोक 18 के अनुसार संसार एक कड़वा वृक्ष है, इसके दो फल ही अमृत जैसे मीठे होते है। एक मधुर
वाणी और दूसरी सज्जन जनों की संगति।

चाणक्य के अनुसार अगर आप इस संसार में फैली नफरत को कम करना चाहते है तो इसके 2 ही रास्ते है
1. मधुर वाणी
2. सज्जन लोगो की संगति

मधुर वाणी अमृत के समान होती है आपकी मधुर वाणी से आपका मन तो शीतल होता है साथ ही दूसरे लोगो का मन भी शीतल करता है 

कहा जाता है कि हम उन 5 लोगों का औसत होते है जिनके साथ हम ज्यादा समय बिताते है। अतः हमे समाज के अच्छे लोगो को चुनकर उनके साथ अपना ज्यादा समय बिताइए। सज्जन लोगो की संगति से हम अपनी कई कमियों को दूर कर अपने जीवन को अच्छी आदतों से भर देगी। जिससे हम सफल हो जायेंगे। 

अच्छे लोगो की संगति के बारे में दूसरी वीडियो सीरीज में बात करेंगे नही तो हम अपने विषय से भटक जायेंगे। इस विडियो सीरीज में हम केवल मधुर वाणी और मधुर वाणी के महत्व के बारे में बात करेंगे। 

चाणक्य नीति की अध्याय 14 श्लोक 14 के अनुसार हे मनुष्य यदि तुम किसी एक ही कर्म के द्वारा सारे संसार को अपने वश में करना चाहता है तो निंदा करने वाली अपनी वाणी को वश में कर ले अर्थात निंदा करना छोड़ दे।   

आचार्य के अनुसार अगर तुम पूरी दुनिया को अपने वश में करना चाहते हो तो लोगो की निंदा करना छोड़ दो। बल्कि अपनी मधुर वाणी से लोगो को अपने प्रति आकर्षित करो। मधुर वाणी में वह क्षमता है कि लोग अपने आप ही आपकी तरफ खींचे चले आते है। जिससे आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।

अर्थात सिर्फ मधुर वाणी से ही पूरी को अपने।वश में किया जा सकता है। इसीलिए मधुर वाणी को अपनी सफलता के।लिए सबसे बड़ा हथियार बनाइए। वास्तव में वही व्यक्ति विद्वान होता है जो परिस्थितियों को भाप कर उसी के अनुकूल बात करे। 

चाणक्य नीति की अध्याय 14 श्लोक 15 के अनुसार जो अवसर के अनुकूल बात करना जानता है, जो अपने यश और गरिमा के अनुकूल मधुर-भाषण कर सकता है और जो अपनी शक्ति के अनुसार क्रोध करता है, उसी को वास्तव में विद्वान कहा जाता है।

व्यक्ति के बात करने के तरीके से उसका आचरण, उसके परिवार की सभ्यता, उसके समाज की सामाजिक स्थति और उसके गुरु के द्वारा दी गई शिक्षा का ज्ञात होता है। व्यक्ति के।द्वारा निकले गलत शब्द व्यक्ति का, उसके।परिवार का, उसके समाज का और उसके गुरु का अपमान करवाते है। अतः व्यक्ति को बहुत ही सोच समझ कर बात करना चाहिए।

आचार्य के अनुसार व्यक्ति को अवसर के अनुकूल अपने यश और गरिमा के अनुसार ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिससे वह दुसरो को अपनी और आकर्षित कर सके। जो व्यक्ति समय और शक्ति के अनुसार मधुर वाणी बोलना जनता है वास्तव में वही विद्वान है। जबकि जो व्यक्ति समय के अनुसार बात नही करता शक्ति से ज्यादा क्रोध करता है और कटु वचन बोलता है वह वास्तव में मूर्ख है। 

क्योंकि व्यक्ति अपनी शक्ति से ज्यादा क्रोध करेगा तो उस व्यक्ति को सामाजिक आर्थिक और शारीरिक रूप से बहुत नुकसान उठाना पड़ सकता है। जैसे आम आदमी किसी राजा के सामने क्रोध करेगा तो उसे दंड भोगना ही पड़ेगा। व्यक्ति की मधुर वाणी से लोग प्रसन्न रहते है।


चाणक्य नीति की अध्याय 16 श्लोक 17 के अनुसार मधुर बोली वाले सभी प्राणी सदैव प्रसन्न रहते है अतः व्यक्ति को सदैव प्रिय वचन ही बोलना चाहिए उसे चाहिए कि वाणी में अमृत रूपी मधुरता घोल कर बोले। व्यक्ति को वाणी से दरिद्र नही होना चाहिए। 

चाणक्य के अनुसार व्याक्ति की मधुर वाणी से सभी प्राणी सदैव प्रसन्न रहते है अतः व्यक्ति को सदैव प्रिय वचन बोलना चाहिए। वैसे भी किसी से दो शब्द मधुर वाणी बोल देने से किसी का कुछ जाता नही नही है इसीलिए व्यक्ति को मधुर वाणी बोलने से नही चूकना चाहिए। 


चाणक्य नीति की अध्याय 7 श्लोक 16 के अनुसार स्वर्ग से इस संसार में आने वाले जीव के शरीर में चार बाते उसके चिन्ह के रूप में रहती है। अर्थात उसके चार प्रमुख गुण होते है। उनमें दान देने की प्रवृत्ति होती है। वह मधुर भाषी होते है। देवतावो की पूजा अर्चना करता है उनका आदर सत्कार करता है। विद्वान ब्राह्मणों को सदैव तृप्त अर्थात संतुष्ट रखता है।  

चाणक्य नीति की अध्याय 7 श्लोक 17 के अनुसार इसी प्रकार नरक में रहने वाले जब देह धारण कर इस संसार में आते है तो वो देवताओं के विपरीत कार्य करते है। वे मधुर भाषी होने के बजाय क्रोधी स्वभाव के होते है। कड़वी बात कहते है वे निर्धन होते है अपने परिवार जनों तथा मित्रो से सदैव द्वेष भाव रखते है उनकी संगति में सदैव नीच लोग रहते है वे नीच कुल वालो की सेवा करते है। 

चाणक्य नीति की अध्याय 7 श्लोक 20 के अनुसार वाणी की पवित्रता मन की शुद्धि इंद्रियों का संयम प्राणी मात्र पर दया धन की पवित्रता मोक्ष प्राप्त करने वाले के लक्षण होते है।  



नीȱत Āंथǂ मƶअÉयाÆम सेसंबंȲधत Ȋोकǂ का आना कुछ पाठकǂ को खटक सकता
है। उÊहƶऐसा लगेगा मानो आचायµ अपनेलÛय सेभटक गए हƹ। लेȱकन ऐसा समझना
आचायµचाण·य के ȅȳǣÆव को न समझ पाना है। अपनी कूटनीȱतक चालǂ सेशčुको मात
देने वालेआचायµ अपनेलÛय को ĒाËत करने मƶइसीȳलए सफल Ɠए ·यǂȱक वेअपने
अंतरमन सेउतनेसरल और सहज थे। महान उद्देÕय को ĒाËत करनेके ȳलए लघु×वाथDŽ को
छोड़नेकɡ उÊहǂनेȳश³ा ही नहƭ दɟ, उÊहƶअपनेआचरण मƶभी ȱवȳशȌ ×थान Ȱदया। अÉयाÆम
उनके जीवन का आधार था। बंधन तो लीला माč है, असल मƶतो उनके सारेĒयास मुȳǣ के
ȳलए ही थे।
उÊहǂने इन Ȋोकǂ Ǽारा बताया ȱक भगवǶा और Ȱदȅता कहƭ अÊयč नहƭ हƹ।
ĒÆयेक मƶवह रची-बसी है। जƞरत हैउसका अनुभव करनेकɡ। आचायµनेउस अनुभव के
ȳलए शुȲचता (पȱवčता) को सबसेआवÕयक माना है। जो वाणी और मन सेपȱवč होगा और
जो Ơसरǂ को Ɵखी देखकर Ɵखी होता होगा वही ȱववेकवान्हो सकता है। परोपकार कɡ
भावना हो, लेȱकन इंȰďयǂ पर संयम न हो, तो भी अपनेलÛय को पाया नहƭ जा सकता। एक
Ȯ×थȱत ĒाËत करनेके बाद मागµसेभटकनेका भय बना रहता है। संयमी तो वहां ×वयं को
संभाल लेता है, जहां इंȰďय लोलुप उलझ जाता है। ȱबना ȱववेक के सÆय का ´ान नहƭ होता
और उसके ȱबना बंधनमुǣ भी नहƭ Ɠआ जा सकता।