नमस्कार साथियों,आपका स्वागत है गुरूंजी की क्लास life Lessons by Guruji में, जो साथी गुरु जी की क्लास में नियमित उपस्थित रहते है उन्हे पता है कि गुरु जी की क्लास में आपको जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनमोल ज्ञान दिया जाता है। इसीलिए अगर गुरुजी की क्लास में पहली बार आए हो तो सब्क्राइब वाली घंटी बजा दे। जिससे आप भी हमारी कक्षा में नियमित उपस्थित रह सके।
साथियों, शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर अपने समस्त गुरुओं चाहे वह स्कूली शिक्षा के गुरु हो या अन्य गुरु सभी को याद कर उन्हें प्रणाम करके अपनी वीडियो शुरू कर रहा हूं क्योंकि आज मैं जो कुछ भी अपने गुरुओं के द्वारा आशीर्वाद के रूप में दिए गए ज्ञान के वजह से हू।
अपनी आज की क्लास में हम चर्चा करेंगे कि ज्ञान का क्या महत्व है ज्ञान कैसे प्राप्त किया जा सकता है विधार्थी को ज्ञान प्राप्त करने के लिए किन 8 चीजों का परित्याग कर देना चाहिए। और ज्ञानार्जन में गुरु का क्या महत्व है। तो चलिए आज की क्लास शुरू करते है।
चाणक्य नीति के अध्याय 3 श्लोक 8 के अनुसार सुंदर रूप वाला यौवन से युक्त ऊंचे कुल में उत्पन्न होने पर भी विद्या से हीन व्यक्ति मनुष्य सुगंध रहित ढाक अथवा टेसू के फूल की भांति उपेक्षित रहता है। प्रसंसा को प्राप्त नहीं होता है।
यदि किसी व्यक्ति ने अच्छे कुल में जन्म लिया है और देखने में।भी उसका शरीर सुंदर है परंतु यदि वह व्यक्ति विद्या से हीन है तो उसकी स्थिति ढाक के उस फूल के समान होती है जो गंध रहित होता है। ढाक का फूल देखने में बहुत सुंदर और बड़ा होता है परंतु जब लोग यह जानते है कि उसमे किसी भी प्रकार की सुगंध नही है तो लोग ढाक के फूल की उपेक्षा कर देते है। न तो वह किसी देवता को चढ़ाया जाता है और न ही साज श्रृंगार में उस फूल का उपयोग किया जाता है। अर्थात ज्ञान से हीन व्यक्ति को समाज उपेक्षित कर देता है उसका बिलकुल सम्मान नही करता।
इसके बाद यह प्रश्न उठता है कि ज्ञान किससे प्राप्त किया जाए क्योंकि ज्ञान तो हर जगह बिखरा हुआ है इस प्रश्न कर उत्तर आचार्य ने अपने इस श्लोक में दिया है।
चाणक्य नीति के अध्याय 17 श्लोक 1 के अनुसार जिन व्यक्तियों ने गुरु के पास बैठ कर शिक्षा प्राप्त नहीं की है बल्कि पुस्तकों से ज्ञान प्राप्त किया है। वह व्यक्ति विद्वान लोगो की सभा में उसी तरह सम्मान नही होता। जिस प्रकार अनैतिक संबंधों से गर्भ धारण करने वाली स्त्री का समाज में सम्मान नही प्राप्त होता है।
आचार्य ने शिक्षक के बिना किताबी ज्ञान को अधूरा माना है आचार्य का मानना है कि गुरु के समीप रह कर ही योग्य शिक्षा पाई जा सकती
है। आचार्य का मानना है कि पुस्तक में कई बाते ऐसी होती है जो शिष्य को समझ में नहीं आती तो गुरु तुरंत उस बात को शिष्य को समझा है कर शिष्य की शंका का समाधान कर देता है। यही कारण है कि शिष्य को जो ज्ञान गुरु से प्राप्त होता है वह अपने आप सम्पूर्ण होता है।
बिना गुरु के प्राप्त ज्ञान आधा अधूरा रहता है। और आधा अधूरा ज्ञान समाज के लिए खतरनाक होता है। ऐसे व्यक्ति समाज में उपहास का पात्र बनते है और अपने ज्ञान का अपमान करवाते है।
इसके बाद आचार्य ने बताया है कि ज्ञान कैसे प्राप्त होता है।
चाणक्य नीति के अध्याय 12 श्लोक 19 के अनुसार जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भर जाता है, उसी प्रकार निरंतर इकट्ठा करते रहने से धन,
विद्या और धर्म की प्राप्ति होती है। ।।
अर्थात विद्या कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे गुरु अपने हाथो से आपके हाथों में दे दे। यहां तक कि गुरु चाह कर भी ऐसा नही कर सकते। विद्या प्राप्त करने के लिए निरंतर अध्ययन करना होता है। जिस प्रकार डॉक्टर के द्वारा दी गई दवा को उसके डोज के अनुसार खाना चाहिए क्योंकि अगर सारी दवा एक साथ ले लेंगे तो दवा फायदा करने कि बजाय नुकसान कर देगी। उसी तरह ज्ञान को धीरे एकत्र करना चाहिए इससे ज्ञान स्थाई होता है।
विद्या आसान वस्तु नहीं है इसके लिए कई चीजों को त्याग करना होता है। आचार्य ने कहा है कि विद्यार्थी को 8 चीजों को परित्याग कर देना चाहिए।
चाणक्य नीति के अध्याय 11 श्लोक 10 के अनुसार विद्यार्थी के लिए आवश्यक है वह काम, क्रोध, लोभ, स्वादिष्ट पदार्थों की ईच्छा,
श्रृंगार, खेल-तमाशे, अधिक सोना और चापलूसी करना आदि इन 8 चीजों का परित्याग कर दे।।
अर्थात आचार्य चाणक्य के अनुसार विद्यार्थी को इन 8 चीजों का परित्याग कर देना चाहिए ये चीजे विद्यार्थी का मन को एकाग्रचित होने नही देती।
1. काम भावना, अर्थात विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण
2. क्रोध
3. लोभ
4. स्वादिष्ट भोजन की इच्छा
5. श्रृंगार
6. खेल तमाशे
7. अधिक सोना
8. चापलूसी करना
ये विषय बहुत बड़े है अगर इनपर विस्तार से चर्चा करेंगे तो वीडियो बहुत बड़ी हो जाएगी। अगर इस श्लोक पर विस्तृत वीडियो चाहिए तो कमेंट कीजियेगा ।
साथियों मैंने वीडियो के प्रारंभ में स्कूली शिक्षा के गुरुओं के साथ साथ अन्य गुरुओं को भी प्रणाम किया था। आचार्य चाणक्य उन अन्य गुरुओं में सामिल है जो अपनी पुस्तक के माध्यम से मेरा मार्ग दर्शन कर रहे है। इसीलिए शिक्षक दिवस के अवसर पर अपनी वीडियो के माध्यम से इस महान गुरु की चरण वंदना कर रहा हू। धन्यवाद



