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भगवद गीता से जानिए डिप्रेशन से कैसे बाहर निकले

भगवद गीता से जानिए डिप्रेशन से कैसे बाहर निकले

जय श्री कृष्णा, साथियों, आशा है आप सभी साथी कुशल मंगल से होंगे। हम अपनी इस सीरीज में काल्पनिक कहानियों के माध्यम से भगवद गीता का मानव जीवन में क्या उपयोग है यह समझाने का प्रयास करते है। इससे कही न कही आप खुद को भगवद गीता से जोड़ पाएंगे। इसी सीरीज में आज कहानी में हम चर्चा करेंगे कि डिप्रेशन से कैसे बाहर निकले तो आइए आज की कहानी प्रारंभ करते है। 


एक दिन गुरु जी अपनी क्लास में बच्चों को पढ़ा रहे थे तभी देखा कि उषा जी उनसे मिलने आई है। गुरु जी ने उषा जी से कहा कि आप ऑफिस में बैठिए मैं क्लास ले कर आपसे मिलता हू। गुरु जी उषा जी को जानते थे उषा जी के दोनो बेटे गुरु जी के स्कूल से ही पढ़े थे। उषा जी के पति एक अच्छी कंपनी में काम करते है और उषा जी का बड़ा बेटा प्रतियोगी परीक्षा पास करके इसी शहर में शिक्षा विभाग में कलर्क के पद पर काम कर रहा था और छोटा बेटा रमन अभी प्रतियोगी परीक्षाओं को तैयारी कर रहा था।

कुछ समय बाद गुरु जी क्लास खत्म करके ऑफिस में जाकर उषा जी से मिले और उनका हाल चाल लिया और आने का कारण पूछा। तब उषा जी बोली कि गुरु जी आप तो जानते ही है रमन घर से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है लेकिन न जाने आज कल उसे क्या हो गया है। जब देखो तब गुस्से में रहता है कभी गुस्से में समान इधर उधर पटकने लगा है अपने पापा को जवाब देने लगा है बड़े भाई से किसी न किसी बात को लेकर झगड़ा करने लगा है और मुझे तो कुछ समझता ही नहीं जब देखो तब डांट देता है कल तो एक बार ऐसा लगा कि कही मुझे मार न दे। इतना कहते ही उषा जी की आंखों में आंसू आ गए।

गुरु जी ने उन्हे संभाला और पीने के लिए पानी दिया। फिर गुरु जी ने पूछा इसमें मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं। उषा जी बोली आप तो रमन को बचपन से जानते है पहले कितना सीधा लड़का था कभी किसी से लड़ाई नहीं की कभी भी उसकी कोई शिकायत नहीं मिली।  आज न जाने उसे क्या हो गया है। रमन आपका बहुत सम्मान करता है अगर आप रमन को समझाएंगे तो रमन आपकी बात जरूर मानेगा।

गुरु जी कहा कि ठीक है शाम को 5 बजे आपके घर आऊंगा कोशिश कीजिएगा कि परिवार के सभी सदस्य उस समय घर पर मौजूद रहे। इसके बाद उषा जी अपने घर चली गई। शाम को 5 बजे गुरु जी उषा जी के घर पहुंच गए परिवार के सभी सदस्य बैठक वाले कमरे में ही थे रमन भी गुरु जी से मिलने आया और पैर छूकर फिर वापस अपने कमरे में चला गया। इस व्यवहार के लिए रमन के पापा ने रमन को डांटना चाहा लेकिन गुरु जी ने उन्हे मना कर दिया। 

कुछ समय बाद गुरु जी रमन से मिलने उसके कमरे में गए रमन बिस्तर पर पेट के बल लेटा हुआ था। जैसे ही गुरु जी ने रमन को आवाज लगाई न जाने रमन को क्या हुआ वह गुरु से चिपक कर रोने लगा। गुरु जी ने उसे संभाला रमन को देख कर लग रहा था कि जैसे वह बहुत बुरे डिप्रेशन में है। 

गुरु जी ने पूछा क्या हुआ बेटा इतना परेशान क्यों हो। इस पर रमन कुछ नही बोला। फिर गुरु जी ने कहा कुछ बताओगे नही तो हम लोग कैसे जानेंगे कि तुम्हे क्या प्रोब्लम है तुम क्यों इतना दुखी हो।  अब जाकर रमन बोला कि गुरु जी आज कल मुझे बहुत गुस्सा आता है एक बार जब गुस्सा आता है तब मुझे समझ में नहीं आता कि क्या करू क्या न करू। इसी उधेड़बुन  में कुछ गलत हो जाता है जिसका मुझे बाद में बहुत पछतावा होता है लेकिन जब तक पछतावा होता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। 

फिर गुरुजी ने पूछा क्या तुम्हारा कोई एग्जाम नही निकल पाया है। इस बात पर रमन ने अपना सिर ऊपर किया। तब गुरु जी समझ गए की यही बात है।  गुरु जी ने कहा रमन तुम्हारे लिए भगवान कृष्ण ने भगवद गीता में बताया है। अगर तुम उस पर अमल कर सको तो बताऊं। इस पर रमन ने सिर हिला कर अपनी सहमति जताई। गुरु जी कहा  कि भगवद गीता में भगवान कृष्ण ने कहा  है।


क्रोधाद्भवति संमोहः संमोहात्स्मृतिविभ्रमः।

स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति।।2.63।।
 

अर्थात विषयोंका चिन्तन करनेवाले मनुष्यकी उन विषयों में आसक्ति पैदा हो जाती है। आसक्ति से कामना पैदा होती है। कामना से क्रोध पैदा होता है। क्रोध होने पर सम्मोह  हो जाता है। सम्मोह से स्मृति भ्रष्ट हो जाती है। स्मृति भ्रष्ट होनेपर बुद्धिका नाश हो जाता है। बुद्धि का नाश होने पर मनुष्य का पतन हो जाता है।
 

इस श्लोक के अनुसार इस जीवन में हम हमेशा कुछ न कुछ इच्छा करते है । इच्छाएं कभी पूरी होती है और कभी पूरी नहीं हो पाती।  जब कभी  हमारी इच्छाएं पूरी न हो तो हमे गुस्सा आता है और अपनी इंद्रियों पर हमारा नियंत्रण नहीं रहता। जबकि यही वह समय होता है जब हमे अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण बनाए रखना है। क्योंकि गुस्सा आते ही हम सबसे पहले अपने विवेक खो देते हैं सामने कौन है उसके सम्मान की परवाह के बिना बातें बोलने लग जाते हैं या कोई ऐसा कदम उठा लेते हैं जिससे हमें पछतावे की सिवाय कुछ और नहीं मिलता। इसीलिए अपने क्रोध पर  नियंत्रण करो  क्योंकि जिस व्यक्ति का उसकी इंद्रियों पर वश नहीं होता उसका पतन हो जाता है।

रमन केवल एक एग्जाम न निकलने पर तुम इतना विचलित हो गए हो अभी इस जीवन यात्रा में न जाने कितनी बार तुम्हे हार का सामना करना पड़ेगा क्या हर बार तुम ऐसे ही गुस्सा करोगे।  इस पर रमन को अपनी गलती का अहसास हो गया उसने गुरु जी अपनी गलती के लिए माफी मांगी। इस पर गुरु जी ने कहा माफी मुझसे नहीं उनसे मांगो जिनको तुमने दोष पहुंचाया है। रमन गुरु जी की बात समझ गया और बाहर निकल कर सभी से माफी मांगी और अपनी मां के गले से निपट कर रोने लगा। 

इसके बाद गुरु जी ने रमन के बड़े भाई से पूछा कि तुम्हारा एग्जाम कितने अटेंप के बाद निकला था। इस पर रमन के बड़े भाई ने कहा गुरु जी ठीक से याद नही लेकिन करीब 20 से 25 एग्जाम में फेल होने के बाद यह एग्जाम निकाल पाया था। और तुम्हारा भाई सोचता है कि पहले अटैंप में अधिकारी बन जायेगा , इसे कुछ समझाओ गुरु जी ने हंसते हुए घर का माहौल कुछ हल्का करने की कोशिश की। 

लगभग 1 साल बाद रमन अपनी मां के साथ विद्यालय आया उसके हाथ में मिठाई का एक डिब्बा था। रमन ने गुरु जी के पैर छुए और कहा कि उसका लोअर पीसीएस का एग्जाम निकल गया है ।  गुरु जी ने मिठाई को मां सरस्वती के चरणों में रखा और फिर सभी स्टाफ में बटवा दिया। और फिर गुरु जी ने रमन से कहा साहब अपने स्कूल में छापा मारने कब आ रहे है। इस पर सभी लोग हसने लगे। 

साथियों इसी के साथ आज की कहानी यही समाप्त होती है अगर कहानी अच्छी लगी हो तो वीडियो को शेयर कर भगवद गीता के प्रचार प्रसार में हमारा सहयोग कीजिए। राधे राधे