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ATOMIC HABITS

अटॉमिक हैबिट्स


जीवन में सफलता के लिए जीवन मे अच्छी आदतो को शामिल करना और बुरी आदतों को छोड़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने अंदर बदलाव लाने के लिए  हम खुद ही जिम्मेदार हैं। आदत निर्माण पर आधारित यह पुस्तक अटॉमिक हैबिट्स जिसके लेखक जेन्स क्लीयर है। इस पुस्तक मे हम जानेंगे कि कैसे हम बुरी आदतों को छोड़ और अच्छी आदतों को अपने जीवन मे शामिल कर सकते हैं।

आदत का मतलब है एक ऐसा व्यवहार जिसे इतनी बार दोहराया जाए कि वह ऑटोमेटिक हो जाए। एटॉमिक के दो अर्थ हैं बहुत छोटा और अपार ऊर्जा का स्रोत। अर्थात एटॉमिक हैबिट्स छोटी-छोटी आदते हैं जो आपके जीवन में बड़ा परिवर्तन लाती हैं। 

आदत को जीवन मे शामिल करे - किसी कार्य को आदत तक पहुंचने के लिए चार अहम कदम होते हैं 
1. संकेत
2. ललक
3. प्रतिसाद
4. पुरस्कार

आइये हम इन चार अहम कदमो का प्रयोग किसी उदाहरण मे करते है जैसे सुबह जल्दी उठना। सुबह जल्दी उठने के लिए आप किसी से प्रेरित होकर यह संकल्प लेते हैं कि हम कल से सुबह जल्दी उठेंगे यह संकेत है, इसके फायदे देखकर कुछ दिन बाद आपको सुबह जल्दी उठने की   ललक उठेगी। प्रतिसाद या जवाब में आप शरीरिक और मानसिक रूप से थोड़ा सा बेहतर महसूस करने लगते हैं। पुरस्कार के रूप में आप पाते हैं अपने समय का सदुपयोग, अच्छा स्वास्थ्य आदि। 

आदतें बनाना - खोज से पता चला है कि बदलाव के प्रति किसी भी प्रकार के प्रतिरोध को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका धीमा और नियमित होता है। हर काम अधीर होकर नहीं करना चाहिए। आदत बनना एक निरंतर प्रक्रिया है जिसे हम जितनी बार दोहराया जायेगा हमारा दिमाग उतना ही प्रभावी बनाता जायेगा। आदत को हम कितना समय दे रहे हैं यह जरूरी नहीं है, बल्कि उसे आप कितनी बार कर रहे हैं यह जरूरी है।

अपने लिए बनाए गए नियम और कायदों को मजबूत करने का एक आसान तरीका है TRACE UP MAP बनाना। इसमें लिखें कि आदतों को शामिल करने से आपको क्या क्या लाभ प्राप्त होगा। इसके बाद जब कभी भी आपका मन इधर-उधर भटकेगा तो यह trace up map आपको अपने नियमों कायदों के पास ले आएगा। आजकल trace up map जगह बहुत सारे मोबाइल ऐप आ गए हैं जो आपको trace up करते रहते हैं। अपने हैबिट को ट्रेस करने के तीन फायदे हैं 

पहला इसे  देखकर आपको नियम पालन का ध्यान रहता है। 

दूसरा इसे देखकर आप स्वाभाविक रूप से प्रेरित होते है। 

तीसरा जब भी आप रिकॉर्ड को देखते हैं आप संतुष्टि महसूस करते हैं। 

रोजमर्रा की आदतें - आप अपनी जिंदगी को तब तक नहीं बदल सकते, जब तक आप अपनी रोजमर्रा की आदतों को नहीं बदलेंगे। आपकी सफलता का रहस्य आपकी आदतों में पाया जाता है। आपकी दिनचर्या की छोटी-छोटी आदतें जैसे सुबह जल्दी उठना और उठ कर योग करना,  सही समय पर पढ़ाई करना आदि आपके व्यक्तित्व को  निखार कर आपको दुसरो से अलग बना देती हैं। जो बदलाव अक्सर छोटे और महत्वहीन लगते हैं उनका नियमित पालन करके आप बहुत अच्छे और अनुकूल परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। 

छोटी-छोटी आदते बड़े बदलाव ला पाती हैं क्योंकि इनको करने के लिए हमें कुछ अलग से सोचना नहीं पड़ता। सभी बड़ी चीजें, छोटी-छोटी कदम से शुरू होती हैं। आपका व्यवहार ही एक दिन आप की पहचान बन जाता है। हमारी सफलता हमारे व्यवहार में ही छिपी है जरूरत है उसको सामने लाने की। 

अच्छी आदते - अच्छी आदते समय को बचाती हैं जबकि बुरी आदते समय का बरबाद करती हैं। यह जरूरी नही है कि आप किसी सफल व्यक्ति की अच्छी आदत को देखकर उस आदत को अपने जीवन में शामिल करते है, तो आप भी सफल हो जाएंगे। लेकिन आप अपने लक्ष्य की तरफ एक कदम और आगे बढ़ जाएंगे। 

बुरी आदते - बुरी आदतों हमारी प्रोडक्टिविटी को कम कर देती हैं। हमारी गति को धीमा कर देती हैं। इससे समाज में हमारी नकारात्मक छवि पड़ती है।  ऐसा नहीं है कि आप बदलना नहीं चाहते बल्कि आपके बदलाव का तरीका गलत है। आइए देखते हैं कि खराब आदतों की क्या कारण है और कैसे इन्हे सुधारा जा सकता है।

बात करते हैं सिगरेट पीने की आदत की। अक्सर दोस्तों के बहकावे में आकर, अपने परिवार में बड़े लोगों को देखकर और समाज में प्रभाव डालने के लिए और स्टाइल मारने के चक्कर में देखते ही देखते यह बुरी आदत, आदत से लत बन जाती है। यह जानते हुए कि सिगरेट पीने से कोई फायदा नहीं बल्कि नुकसान ही होता है  हम इस आदत को छोड़ नही पाते है। यहाँ तक कि कई बार हम बोरियत दूर करने, टाइम पास करने के लिए भी सिगरेट के कश मार लेते है। 

अच्छी आदतों को जीवन मे शामिल करना और बुरी आदतों को छोड़ना - मनुष्य में काम को टालने की आदत होती है। इसका सबसे बेहतर उपाय है 2 मिनट का नियम अर्थात कोई भी नयी आदत सिर्फ 2 मिनट से शुरू करें उसके बाद उसको बढ़ाते जाएं। 

हमारी आदत का हमारे आसपास के माहौल से सीधा संपर्क है।  रिसर्च से सिद्ध हो चुका है जो भी चीज हमारे आसपास नजर आती है उसी के अनुसार हमारी आदत बन जाती है। जैसे कि थोड़ी थोड़ी दूरी पर पानी की बोतल रखी हो तो हम बार-बार पानी पीने लगेंगे। अतः हमें आसपास का माहौल कैसा बनाना चाहिए जिससे हमें अच्छी आदते पड़े और बुरी आदतों से दूर रहे। 

हर आदत की शुरुआत जरूरत से होती है। जरूरत की उपज हमारे आसपास के माहौल से होती है अतः हमें आसपास का माहौल ऐसा बनाना चाहिए जिससे हमें बार-बार अपनी अच्छी आदत करने की प्रेरणा मिले। अपने आप से यह कहे कि हम अपने जीवन में बदलाव लाएंगे तभी आप अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं कोई भी अच्छी आदत एक महीने का समय लेती है  तब वह हमारी पक्की आदतो में शामिल होती है। 

अच्छी आदतों के बीच से अवरोध कम करें बुरी आदतों के बीच से अवरोध बढा ले। आपकी आदतों मे सुधार हो जायेगा। 

अच्छी आदत बनाने के लिए उसको अनिवार्य कर दें, जैसे कि जिम ट्रेनर का पैसा आप एडवांस दे दें। एक बार जब आप एडवांस में पैसे दे देंगे तो मजबूरी में आप पूरे महीने का जिम करेंगे और फिर जिम करना आपकी आदत बन जाएगी। 

हमको वह आदत बनाना ज्यादा अच्छा लगता है जो तुरंत आनंद दे। अतः हमें आदत निर्माण के समय ऐसा काम करना चाहिए कि आदत निर्माण रुचि कर लगे। सभी अच्छी आदत को पक्की आदत बनाने के लिए उसको रोचक बनाए रखें उसे कभी भी उबाऊ ना बनने दें। 

कोई भी आदत कभी अकेला नहीं बनता। एक अच्छी आदत के बाद दूसरी अच्छी आदत अपने आप आ जाती है। वैसे ही एक बुरी आदत के बाद दूसरी बुरी आदत अपने आप आ जाती है।

लेखक के अनुसार आत्म नियंत्रण हमेशा काम नहीं करता यह कुछ समय के लिए ही ठीक है। 

जब हम अपने गोल के प्रति सजग रहेंगे तो हमारे गोल के बीच में आने वाली बुरी आदतों को अपने रास्ते से हटा पाएंगे। 

आदतों का मिश्रण - अपनी बुरी आदत और अच्छी आदत का मिश्रण करिए। मान लीजिए चाय पीना आपकी बुरी आदत है और पैदल चलना अच्छी आदत।  आप यह संकल्प लीजिये कि पहले आप 5 मिनट पैदल चलेंगे फिर एक कप चाय पियेंगे। इस तरह आपने अपने जीवन मे अच्छी आदत से बुरी आदत के प्रभाव को खत्म कर दिया। 

आदतों को प्रभावित करने वाले तत्व  - हमारे परिवार और मित्र, हमें सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। हम जाने या अनजाने इन लोगों की नकल करते हैं। प्रमुख रूप से हम तीन तरह के समूह हैं जिनसे हम प्रभावित होते हैं
1. करीबी समूह जैसे परिवार
2. बड़ा समूह जैसे इंटरनेट ग्रुप
3. शक्तिशाली समूह जैसे सेलिब्रिटी

कम प्रयास मे अधिक परिणाम - जब हमें दो काम दिया जाता है जिसमे एक काम में ज्यादा मेहनत हो वह दूसरे काम में कम मेहनत हो तो हम अक्सर ऐसा काम चुनेंगे जिसमें कम मेहनत करनी पड़ती हो। 
इसी तरह अगर कोई काम आपके काम के दौरान पड़ता है तो आप उसे आसानी से कर लेंगे। मान लीजिए आपका जिम आपके मॉर्निंग वॉक वाले रूट पर हो तो आप पर जिम कर लेंगे। लेकिन वही जिम अगर दूसरी रूट पर हो तो आप उसे नहीं करेंगे पाएंगे या आप कुछ दिन बाद जिम छोड़ देंगे। 

जवाबदेह भागीदारी - जब मनुष्य के काम को टालने के परिणाम गंभीर होते हैं तो लोग जल्दी सीखते हैं और टालने के प्रति सावधान रहते हैं। 

जब हमारी आदतों से दूसरों को तकलीफ होती है तो हम उस आदत को दोहराने से बचेंगे। 

लक्ष्य को भूल जाएं - जब हम अपनी आदतों को अपने लक्ष्य के साथ जब जोड़ेंगे तब लक्ष्य तक पहुंचने के बाद हमें लगेगा यह काम तो हो गया अब आदत को करने की क्या जरूरत है। अगर अच्छी आदत जीवन भर के लिए शामिल हो जाए तो क्या बुराई है। इसलिए लक्ष्य को भूल कर आदतों पर फोकस कीजिये। 

प्रतिभा और नेचुरल जींस - सिर्फ हमारे जींस हमारे लिए मार्ग नहीं बना सकते हैं उसके लिए हमारा जीवन शैली बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 

जिन कामों करने से दुसरो को तकलीफ होती है लेकिन आपको आनंद आता है तो आप जान लीजिए आप उन्हीं कामों के लिए बने हैं।