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चाणक्य नीति और विवाह


चाणक्य नीति के अनुसार अपना जीवनसाथी किसे और कैसे चुने

नीति का शाब्दिक अर्थ है जो आगे ले जाए। 
जिस प्रकार विज्ञान के सिद्धांत की पुष्टि विभिन्न मापदंडों पर एक समान रहने पर की जाती है। उसी तरह जीवन में नीति की पुष्टि विभिन्न मापदंडों पर एक समान रहने पर की जाती है।
आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र को विज्ञान कहा है। अब आप सोच रहे होंगे कि 2500 वर्ष पूर्व लिखी गई नीतियां आज भी वही परिणाम दे सकती है। जबकि दोनो समय के रहन सहन में बहुत परिवर्तन आ चुका है। तो ये नीतियां समय काल से प्रभावित नहीं होती और आज भी आपको जीवन में सफल बनाने में सक्षम है। 

आचार्य ने लिखा है कि राजनीति में कभी कभी ऐसे कदम उठाने पड़ते है जो नीति विरुद्ध लगते है। इसके लिए आपको उस कदम के लाभ के बारे में सोचना चाहिए। अगर आपके कदम से जन कल्याण होता हो वो कदम नीति विरुद्ध होते हुए भी सही है। जैसे की महाभारत में युधिष्ठिर ने द्रोणाचार्य बध के समय की थी। उस समय  नीति के ज्ञाता श्री कृष्ण ने इस कदम को सही बताया था।

अर्थ
बुद्धिमान व्यक्ति को अच्छे कुल में जन्म लेने वाली कुरूप स्त्री से भी विवाह कर लेना चाहिए। जबकि अच्छे रूप वाली नीच जन्म लेने वाली स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए।

व्याख्या 
आचार्य के अनुसार व्यक्ति के जीवन में विवाह  एक बहुत महत्वपूर्ण घटना है। इसीलिए व्यक्ति को अपना विवाह बहुत सोच समझ कर करना चाहिए। विवाह का निर्णय जल्दबाजी में नहीं चाहिए।  

आचार्य के अनुसार शरीर की बाहरी सुंदरता सिर्फ दिखावा मात्र है।  जीवन साथी भले ही कुरूप हो लेकिन अच्छे गुणों वाला व्यक्ति को  जीवन साथी को चुनना चाहिए। और ये देखना चाहिए कि आप उस व्यक्ति के साथ अपना पूरा जीवन गुजार पाएंगे। जबकि जीवन साथी सुंदर हो लेकिन अच्छे गुण वाला न हो उसे नही चुनना चाहिए। 

आचार्य ने अन्य श्लोक में लिखा है कि जिस प्रकार सुनार सोने को घिसकर, तपाकर, काटकर और कूटकर परीक्षा लेता  है। उसी प्रकार मनुष्य की परीक्षा की जानी चाहिए।

वैसे तो आचार्य में यह श्लोक पुरुषो के लिए लिखा है लेकिन यह बात महिलाओ पर भी लागू होती है। क्योंकि अन्य श्लोक में आचार्य ने कन्या के पिता से भी कहा है कि कन्या का  विवाह अच्छे कुल के पुरुष के साथ करना चाहिए। ये 2500 साल पुरानी बात है वर्तमान में कन्या भी अपने जीवन साथी का चुनाव करती है इसीलिए कन्या को भी  जीवन साथी में सुंदरता न देख कर अच्छे गुण को देखना चाहिए।   

लेकिन सौभाग्य से अगर आपको ऐसा जीवन साथी मिल जाता है जो अच्छे गुणों के साथ सुंदर भीं है। तो ये आपके पूर्व के जन्मों के अच्छे कर्मों का फल है। जितनी जल्दी हो ऐसे व्यक्ति से विवाह कर ले।