जिंदगी को खुश रह कर जियो क्योंकि रोज शाम सिर्फ सूरज ही नही ढलता आपकी जिंदगी भीं ढलती है। DALAI LAMA, DECIMAN TUTU, DOBLUS ABROUM की पुस्तक THE BOOK OF JOY में हमे बताया गया है कि कैसे हम खुद ही अपने दुखो को दूर कर सकते है। यह पुस्तक दुनिया के दो जाने माने धार्मिक गुरु दलाई लामा और डेसिमैन टूटू की सात दिवसीय बैठक का नतीजा है। हमारे लिए सबसे अच्छी बात हैं कि यह बैठक 2015 में भारत के धर्मशाला में हुई थी। जब इतने महान लोग बैठक कर अपने जीवन का मंथन रहे हों तो इस मंथन से हमे अमृत ही प्राप्त होगा।
इस बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि संसार में इतने दुख के बावजूद कैसे कोई सुख का अनुभव कर सकता है। इस किताब में यह बात समझाई गईं है कि कैसे खुशी ढूंढने के लिए किसी के पास नहीं जाना होता, जबकि असली खुशी हमारे भीतर ही होती है। इस पुस्तक में सुख के आठ पिलर्स दिए है जिसको व्यक्ति समझ कर जीवन के मूल सुख को पा सकता है। रिसर्च में भीं यह बात साबित हुई है कि जीवन के सुख दुख हमारे सोच पर निर्भर करते है।
खुशी के 8 स्तंभ - महान दार्शनिक दलाई लामा के अनुसार इन 8 स्तंभों को अपना कर कोई भी खुशी की अनुभूति कर सकता है। और अपने जीवन को सफल बना सकती है।
1. उम्मीद . किसी से उम्मीद रखना हमारे दुख का कारण हो सकता है। इसीलिए हमें दूसरो या खुद से उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
2. घटनाओं को देखने का हमारा नजरिया - हमे अपनी समस्या को हर नजरिए से देखना चाहिए। इससे आपका दुख बहुत कम हो जायेगा।
3- विनर्मता - अहंकार को अपने से दूर करना। अहंकार हमारे मन और शरीर दोनो को कमजोर कर देता है। रिसर्च में पाया गया है कि अहंकारी लोग हार्ट अटैक और डिप्रेशन के ज्यादा शिकार होते है।
4. जोयफुल नेचर - गुस्सा आने पर आप अपना ही नुकसान करते है। इसीलिए आपको जब भी गुस्सा आए तब एक दम से रिएक्ट न करे कुछ देर शांत हो जाए। हमे पैसेंस और टोलरेंस रखना चाहिए। दूसरी की कमियों पर गुस्सा न करे कमियां सब में है। जीवन में छोटी छोटी खुशियों को ढूंढे और उनको एंजॉय करे।
5. चिंता करने से आपकी समस्या कम नही हो जायेगी। इसीलिए चिंता न करे। बल्कि अपना फोकस काम पर लगाना चाहिए।
6. दूसरो की गलती को क्षमा कर देना आपको खुशी प्रदान करता है। दूसरो के प्रति क्षमा की भावना आपको खुशियां प्रदान करती है।
7. दया आपके जीवन में आनंद प्रदान कर सकती है। दया की भावना अपने मन में बनाए रखे।
8. जब आप दूसरो की मदद करते है तो उसकी खुशी में आप अपना दुख भूल जायेंगे। इससे आपको बहुत खुशी मिलेंगी।
भौतिक सुख साधन तो शारीरिक श्रम से प्राप्त किए जा सकते है जबकि मानसिक सुख सिर्फ मानसिक शांति से प्राप्त हो सकती है। आपको क्या लगता है कि मुकेश अंबानी या इवान मस्क कभी दुखी नहीं होते होंते। इसी लिए लक्जरी आइटम सिर्फ कुछ समय के लिए खुशियां प्रदान कर सकते है। जबकि मानसिक सुख आपके साथ आजीवन रहेगा।
जिस तरह से नवजात शिशु को मां का स्पर्श शिशु को मानसिक शांति और सुरक्षा महसूस कराता है। उसी तरह अगर हम ये विश्वास कर ले कि भगवान, मां की तरह हमारे साथ है तो ये विश्वास हमे मानसिक शांति और सुरक्षा प्रदान करेगा।
सभी के जीवन में दुख शामिल है। यह स्वाभाविक है इसे हम टाल नहीं सकते। हमे दुख से सबक सीखना चाहिए। नेनशन मंडेला ने 27 साल के जेल के दुखी जीवन से उन्होंने दूसरो के दुख और तकलीफों के बारे में समझा।इसीलिए जब हम दुखी होते है तब हमे अपना फोकस दूसरो के दुख और तकलीफों पर करना चाहिए। इससे हमारा दुख बहुत कम हो जायेगा। दुख और तकलीफों से अपने जिंदगी के सफर और अपने कार्यों को रोकना नहीं चाहिए। रोकने से हमारा दुख बढ़ जाता है। जबकि कार्य को जारी रखने से हमारा फोकस प्वाइंट बदल जाता है और हमे अपने दुख कम लगने लगता है।
दुख हमारे लिए मेंटल ट्रेनिंग है। इसीलिए दुख से कभी तनाव नहीं लेना चाहिए। जब आप ऐसी स्थति में हों जिसे आप बदल नही सकते तो उसे स्वीकार कर ले। उसे अपने धैर्य की ट्रेनिंग के रूप में ले। मान लीजिए आप ट्रैफिक जाम में फंस गए है अब आप यह सोच कर तनाव लेंगे कि अब आप ऑफिस के लिए लेट हों जाएंगे तो इससे दुख बढ़ेगा। अगर आप ट्रैफिक जाम को मेंटल ट्रैनिंग के रूप में लेंगे तो आपका दुख बहुत कम हों जायेगा। इसी तरह बच्चे के जन्म के समय हर महिला को पता होता है कि उसे असहनीय दुख और दर्द होगा लेकिन मां बनने की खुशी उसके दुख को कम कर देती है।
अंत में दुख से बचने का कोई भी तरीका अस्थाई होता है। दुख आपके जीवन में आएगा ही। इसे स्वीकार करना चाहिए। जब हमे पता है कि ना तो हम दुख से भाग सकते है और न ही दुख को बदल सकते है तो क्यों न हम समुद्र की तरह दुख का सामना करे। जिस तरह समुद्र के जल में उपर की तरह बहुत उथल पुथल रहती है लेकिन गहराई में बिलकुल शांत रहता है। मानव को भी इसी तरह रहना चाहिए। उपर जितनी भी उथल पुथल हो अंदर से बिल्कुल शांत रहना चाहिए।
शारिरिक नही आत्मिक संबंध बनाए मजबूत- अपनी जीवन यात्रा के दौरान हमारे साथ कई सगे समंधी मित्र और रिश्तेदार जुड़ते है। जो आपकी सुचारू जीवन यात्रा में बहुत सहायक होते है। इसीलिए ये जरूरी है कि हमारा सभी के साथ आपसी प्रेम बना रहे। दलाई लामा कहते है कि किसी भी रिश्ते में शारीरिक वासना से ज्यादा जरूरी है मानसिक लगाव। मानसिक लगाव के लिए जरूरी है संबंध शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक हो।
मानसिक संबंध मजबूत बनाने के लिए एक दूसरे पर ट्रस्ट करे। कभी भी एक दूसरे को धोखा न दे। कमियों के लिएं क्रिटिसाइज न करे बल्कि समझदारी से इस संबंध में बात करे। ध्यान से दूसरे की बात सुने। सुनना हमारे संबंधों के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन अगर सिर्फ एक व्यक्ति ही अपनी बात सुनाता जायेगा लेकिन दूसरे की बात नही सुनेगा तो सकता है कि भविष्य में आपस में बहुत बड़ा झगड़ा हो जाए। अच्छी चीजों के लिए कॉम्प्लीमेंट दे। एक दूसरे से बात करने के लिए समय निकालें। हमेशा चेक करते रहे कि क्या दुसरा व्यक्ति इस रिश्ते से खुश है। अक्सर रिश्तों को निभाने में गलतियां हो जाती है। जो लोग अपनी गलतियों से सबक न लेकर उन्हें बार बार दुहराते है। ऐसा रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिक सकता है।