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चाणक्य नीति के अनुसार इन कर्मो।को करने से मोक्ष।की प्राप्ति होती है

चाणक्य नीति के अनुसार इन कर्मो।को करने से मोक्ष।की प्राप्ति होती है
अध्याय 7 श्लोक 16 के अनुसार स्वर्ग से इस संसार में आने वाले जीव के शरीर में चार बातें उसके चिन्ह के रूप में रहती हैं तथा उसके चार प्रमुख गुण होते हैं उसमें दान देने की प्रवृत्ति होती है वह मधुर भाषी होता है देवताओं की पूजा अर्चना करता है उनका आदर सत्कार करता है और विद्वान ब्राह्मणों को सदैव तथा संतुष्ट सकता है।
और अध्याय 7 श्लोक 20 के अनुसार वाणी की पवित्रता मन की शुद्धि इंद्रियों का संयम प्राणी मात्र पर दया धन की पवित्रता मोक्ष प्राप्त करने वालों के लक्षण होते हैं।
इन दोनों श्लोक का सम्मिलित विश्लेषण करने से यह पता चलता है कि आचार्य के अनुसार मनुष्य  में अगर ये गुण हो तो वो देवताओं के समान हो सकता है।
दान - चाणक्य के अनुसार आपको दान करना चाहिए। आधुनिक लेखक भी मानते है कि आपको अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए। दान करने से आपको अपने ऊपर बिस्वास पैदा होता है और यही विश्वास आपको सफलता की तरफ ले जाता है। 
वाणी की मधुरता - चाणक्य के अनुसार आपको बोलते समय अपनी वाणी मधुरता रखनी चाहिए। किसी को ऐसे शब्द नही बोलने चाहिए जो उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचाए। आपके बोले गए शब्दो से आपके माता पिता के द्वारा दिया गया आचरण, आपके गुरु  द्वारा दी गई शिक्षा और आपके समाज द्वारा सिखाई गई सभ्यता का पता चलता है। आपके द्वारा बोले गए कुछ गलत शब्द इन सभी लोगो को अपमानित करते है। इसीलिए बोले गए शब्दो के चयन में बहुत सावधानी रखे।
मन की पवित्रता - आचार्य के अनुसार आपका मन पवित्र होना चाहिए जिससे आपके इंद्रियों पर आपका बस रहेगा। आप क्रोध में दुख में खुशी में या किसी भीं परिस्थिति में आप स्थिर रहेंगे और अपनी सीमाओं को नही लघेंगे। 
देवताओं और विद्वानों का सम्मान - चाणक्य के अनुसार आपको देवताओं और विद्वान लोगो का सम्मान करना चाहिए। कहा जाता है कि सम्मान देने से सम्मान मिलता है। इसीलिए आपको समाज में प्रतिष्ठित लोगो का सम्मान करना चाहिए। 
इनके अलावा मनुष्य को प्राणी मात्र पर दया।करनी चाहिए। उसका अर्जित धन पवित्र अर्थात ईमानदारी से कमाया हुआ होना चाहिए।