दोस्तो क्या आपने कभी भगवान की बात चीत सुनी है। नही
क्या आप भगवान और उनके भक्त की बात सुनना चाहते है
तो आप बिल्कुल सही जगह आए है
आज से मैं आपको, भगवान श्री कृष्ण और उनके भक्त और मित्र महारथी अर्जुन के बीच हुई बात चीत सुनाने जा रहा हूं। जो कि भगवत गीता नामक पुस्तक के रूप में है। इस बात चीत से मिले ज्ञान से आपको अपनी जीवन यात्रा के दौरान होने वाली कई कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी। इसी कारण भगवत गीता को मानव जीवन का संविधान कहा जाता है और कोर्ट में गवाही के पहले भगवत गीता की सपथ दिलाई जाती है।
यह बात चीत उस समय की है जब पांडवो और कौरावो के बीच महाभारत का युद्ध किसी भी क्षण प्रारंभ ही होने वाला था। उस समय महारथी अर्जुन व्याकुल हो गए और भगवान श्री कृष्ण से रथ को युद्ध के मैदान के बीचों बीच ले जाने को कहा। मैदान के बीचों बीच जाकर दोनो तरफ की सेनाओं पर नजर दौड़ाई।
तब और भीं अधिक व्याकुल होकर अस्त्र और शस्त्र त्याग कर दुखी मन से भगवान श्री कृष्ण से कहा कि युद्ध के मैदान में दोनो तरफ अपने ही लोग है इन पर विजय पाकर हस्तिनापुर तो क्या तीनों लोको का साम्राज्य मुझे मिले तो वह मेरे लिए किस काम का। इन्ही परिस्थितियों में भगवान श्री कृष्ण में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। इस बातचीत से जो ज्ञान प्राप्त हुआ है उसे मैं आगे आने वाली वीडियो में आपको सुनाऊंगा।
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि भगवत गीता तो एक धार्मिक ग्रंथ है। इससे मुझे अपने जीवन में क्या लाभ मिलेगा। तो आइए अब हम भगवत गीता से मिलने वाले लाभ के।बारे बात करते है।
1. भगवत गीता मामूली धार्मिक पुस्तक नहीं है बल्कि यह पुस्तक मानव जीवन का संविधान है। इसमें मानव जीवन से संबंधित हर पहलू में विस्तार से बताया गया है।
2. भगवत गीता के नियमित पाठ से आपके मन के भ्रम दूर होते है जिससे आपको निर्णय लेने में आसानी है।
3. भगवत गीता के नियमित पाठ से मन से निगेटिव विचार दूर होते है। मन बिलकुल शांत रहता है।
4. भगवत गीता के नियमित पाठ से हमारी।सोचने और समझने की शक्ति में वृद्धि होती है।
5. भगवत गीता के नियमित पाठ से हमारे मन का सारा भय दूर हों जाता है और हम निर्भय बन जाते है।
6. भगवत गीता हमारे ज्ञान की सीमाओं को तोड़ कर हमारे ज्ञान को बढ़ा देती है।
7. भगवत गीता का नियमित पाठ करने वाला व्यक्ति सदैव प्रसन्न रहता है।
लगभग 6000 वर्षो पूर्व भगवान ने जो उपदेश दिया है वो आज भी उतना कारगर है। यह श्रस्ति का ऐसा संविधान है जिसमे आजंतक कोई परिवर्तन हुआ है और न ही कभी होगा। क्योंकि इस संविधान के प्रतिपादक स्वम भगवान श्री कृष्ण है।
भगवद गीता के उपदेश में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जो मानव भगवद गीता का नियमित पाठ करेगा वह मुझे प्रिय होगा और मुझे प्राप्त कर पाएगा।
इसीलिए दोस्तो जितना हो सके भगवत गीता का पाठ कर भगवान को प्रसन्न करे।
जय श्री कृष्ण,