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स्त्री है कुछ भी कर सकती है

चाणक्य नीति के अध्याय 1 श्लोक 5 के अनुसार दुष्ट स्वभाव वाली, कठोर वचन बोलने वाली, दुराचारिणी स्त्री और धूर्त और दुष्ट स्वभाव वाला मित्र सामने बोलने वाला मुंहफट नौकर और ऐसे घर में निवास जहां सांप के होने की संभावना हो ये सब बाते मृत्यु के समान है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 1 श्लोक 4 के अनुसार मूर्ख शिष्य को उपदेश देने, दुष्ट- व्यभाचारिणी स्त्री का पालन-पोषण करने, धन के नष्ट होने तथा दुखी व्यक्ति के साथ व्यवहार रखने से बुद्धिमान व्यक्ति को भी कष्ट उठाना पड़ता है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 1 श्लोक 17 के अनुसार पुरुषो के अपेक्षा स्त्रियों का आहार अर्थात भोजन दोगुना होता है, बुद्धि चौगुनी,
साहस छह गुना और कामवासना आठ गुना होती है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 2 श्लोक 1 के अनुसार झूठ बोलना, बिना सोचे समझे किसी काम को प्रारंभ कर देना, दुस्साहस करना, छलकपट करना, मूर्खता पूर्ण कार्य करना, लोभ करना, अपवित्र रहना और निर्दयता- ये स्त्रियों के स्वाभाविक दोष है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 2 श्लोक 15 के अनुसार जो वृक्ष नदी के किनारे उगते है, जो स्त्री दुसरो के घर में।रहती।है जिस राजा के मंत्री अच्छे नहीं होते है। वे जल्द नष्ट हो जाते है इसमें कोई भी संशय नहीं है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 2 श्लोक 17 के अनुसार  वैश्या निर्धन पुरुष को, प्रजा पराजित राजा को, पक्षी फलहीन वृक्ष को और अचानक आया हुआ अतिथि  भोजन करने के बाद घर को त्याग को चले जाते है। 


चाणक्य नीति के अध्याय 2 श्लोक 20 के अनुसार प्रेम व्यवहार बराबरी वाले व्यक्ति में ठीक रहता है। यदि नौकरी करनी ही हो तो
राजा की नौकरी करनी चाहिए। कार्य अथवा व्यवसाय में सबसे अच्छा काम व्यवसाय करना
है। इसी प्रकार उत्तम गुणों वाली स्त्री की शोभा घर में है।  

चाणक्य नीति के अध्याय 3 श्लोक 9 के अनुसार कोयल का सौंदर्य उसके स्वर में है  उसकी मीठी आवाज  में है, स्त्रियों का सौंदर्य उनका पतिव्रता होना है, कुरूप लोगो का सौंदर्य उनकी विद्यावान होने में है। और तपस्यियो का सौंदर्य उनकी क्षमावान होने में है  

चाणक्य नीति के अध्याय 4 श्लोक 8 के अनुसार अशिक्षित तथा अनुपयुक्त स्थान या ग्राम में।रहना नीच व्यक्ति के सेवा, अरुचिकर और पाष्टिकता से रहित भोजन करना, झगड़ालू स्त्री  मूर्ख पुत्र और विधवा कन्या , ये छह बाते ऐसी है तो बिना अग्नि  के ही शरीर को जलाती रहती है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 4 श्लोक 10 के अनुसार इस संसार में दुखी लोगो को तीन बातो से ही शांति  हो सकती है—अच्छी 
संतान, पतिव्रता पत्नी और सज्जन का संग। 

चाणक्य नीति के अध्याय 4 श्लोक 13 के अनुसार पति के लिए वही पत्नी उपयुक्त होती है, जो मन, वचन और कर्म से एक जैसी हो और अपने कार्यों में निपुण हो, इसके साथ ही वह अपने पति से प्रेम रखने वाली तथा सत्य बोलने वाली होनी चाहिए  ऐसी स्त्री को ही श्रेष्ठ पत्नी माना जा सकता है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 5 श्लोक 15 के अनुसार विदेश में विद्या ही मनुष्य की सबसे सच्ची मित्र होती है।  घर में अच्छे स्वभाव वाली और गुणवती पत्नी ही मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती है। रोगी व्यक्ति को दवाई मित्र है और जो मनुष्य मार गया होता है धर्म कर्म ही उसका मित्र होता है। 

चाणक्य नीति के अध्याय 6 श्लोक 12 के अनुसार बुरे राज्य की अपेक्षा किसी प्रकार का राज्य न होना अच्छा है। दुष्ट मित्र के अपेक्षा मित्र न होना अच्छा है। दुष्ट शिष्यों की अपेक्षा शिष्य न होना अच्छा है। और दुष्ट पत्नी का पति होने से अच्छा है पत्नी ही न हो।