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संकट का सामना


नमस्कार साथियों, आपका स्वागत है Life Lessons के माध्यम से अपने जीवन यात्रा को सफल और सुगम बनाने वाले अपने अभियान में।  साथियों आज हम चर्चा करेंगे कि चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने हमे संकट का सामना करने के लिए कौन कौन सी नीतियां बताई है। इन नीतियों को जान कर आप आसानी से संकट का सामना कर पाएंगे। तो आइए चर्चा प्रारंभ करते है


साथियों जिस व्यक्ति ने इस धरती पर जन्म लिया है उसे जीवन में संकट का सामना करना ही पड़ता है।  दुनिया में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसके जीवन में संकट न आया हो। 

चाणक्य नीति के अध्याय 3 श्लोक 1 के अनुसार संसार में ऐसा कौन-सा कुल अथवा वंश है, जिसमे कोई-न-कोई दोष अथवा अवगुण न हो, प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी रोग का सामना करना ही पड़ता है, ऐसा मनुष्य कौन-सा है, जो किसी व्यसन में न पड़ा हो और कौन ऐसा है जो सदा ही सुखी रहता हो, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संकट तो आते ही है। 

अर्थात आचार्य चाणक्य के अनुसार संसार के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संकट आते है। व्यक्ति के जीवन में निम्न संकट आते है 
शारीरिक दोष या अवगुण - चाणक्य के अनुसार संसार का शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसमे शारीरिक दोष न हो, व्यक्ति को चाहिए कि वह अपनी शारीरिक दोष को सुधारे लेकिन अगर दोष सुधारे जाने योग्य न हो तो उस दोष पर ध्यान न देकर अपने लक्ष्य पर फोकस करना चाहिए। जब आप सफल हो जायेंगे तो लोग भी आपके दोष को भूल जायेंगे।

रोग - शारीरिक दोष की तरह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी रोग से ग्रसित होता है। इसीलिए हमे अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करना चाहिए। ताकि रोग ही न हो फिर भी अगर रोग से ग्रसित हो जाए तो उसका उपचार कराए। ताकि रोग आपकी बाधा न बन सके।

व्यसन - आज के समाज में नशा या व्यसन बहुत बुरी तरह फैला हुआ है। शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो नशा से मुक्त हो। इसीलिए जब आप नशे से ग्रसित हो तो उसकी मुक्ति का उपाय करे।

अर्थात प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी संकट का सामना करना पड़ता है। अचानक आया  संकट हमारे दुख का।कारण बनता है। इसीलिए संकट के लिए तैयार रहे लेकिन संकट से डरे नहीं उसका सामना करे।


चाणक्य नीति के अध्याय 5 श्लोक 3 के अनुसार संकट प्रत्येक मनुष्य पर आते ही है परंतु बुद्धिमान व्यक्ति को संकट और आपत्तियों से तभी डरना  चाहिए जब तक वे सिर पर न आ जाएं। संकट और दुख आने पर तो व्यक्ति को पूरी शक्ति से उन्हे दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।

अर्थात आचार्य चाणक्य कहते है कि सिर्फ अफवाह सुनकर संकट से डरना नहीं चाहिए। पहले संकट का सामना करने के लिए तैयार हो जाए और जब संकट सिर पर मंडराने लगे तो उसका डट कर सामना करना चाहिए। ताकि वह संकट दूर हो सके। इसके लिए संकट से बचने के उपाय करना चाहिए। 

चाणक्य नीति के अध्याय 5 श्लोक 11 के अनुसार दान देने से दरिद्रता नष्ट होती है, अच्छे आचरण से कष्ट दूर होते है, मनुष्य की दुर्गति समाप्त होती है, बुद्धि से अज्ञानता या मूर्खता नष्ट होती है, ईश्वर की भक्ति से भय दूर होता है।
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अर्थात आचार्य चाणक्य के अनुसार हमे संकट के अनुसार उसका सामना करना चाहिए। जैसे 

दरिद्रता - अपने जीवन में दरिद्रता से बचने के लिए दान करना चाहिए। आप को विश्वास नहीं हो रहा होगा। लेकिन चाहे प्राचीन पुस्तक चाणक्य नीति हो या आधुनिक समय में लिखी गई फाइनेंस की लाखो पुस्तके हर पुस्तक में यह लिखा होगा कि फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए हमे दान करना चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे कि ये दान देने से फाइनेंशियल फ़्रीडम कैसे मिलेगा। साथियों दान करने से सामने वाली की खुशी देखकर हमे खुशी मिलती है और हमारे मस्तिष्क में यह संदेश जाता है कि हमारे पास पर्याप्त धन है। यही प्रचुरता का अहसास हमे फाइनेंशियल फ्रीडम दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

कष्ट - व्यक्ति को अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के  कष्ट आते है लेकिन व्यक्ति अपने अच्छे व्यवहार, वाणी की मधुरता, सुशीलता से अपने कष्टों को दूर कर सकता है। क्योंकि अन्य व्यक्ति भी अच्छे आचरण वाले व्यक्ति को ही आगे बढ़ाने में मदद करते है।

अज्ञानता और मूर्खता - व्यक्ति अपने ज्ञान और बुद्धि से अपनी और दुसरो की अज्ञानता और मूर्खता को को दूर कर सकता है। 

भय - भगवान सर्व शक्तिमान है वह व्यक्ति के सभी कष्टों को दूर कर सकता है। इसीलिए  जब भी कभी व्यक्ति को भय महसूस हो भगवान के शरण में चले जाना चाहिए। भगवान सभी कष्टों का निवारण करते है। 

साथियों संकट सभी के जीवन में आते है इसीलिए व्यक्ति को संकट के लिए तैयार रहना चाहिए। और जब संकट आए तो पूरी ताकत से संकट का सामना करना चाहिए। भगवान आपके सभी संकट और कष्टों को दूर करे।

धन्यवाद