नमस्कार साथियों, आपका स्वागत है life Lessons के मध्यम से अपने जीवन को सफल और सुगम बनाने वाले अपने अभियान में।
साथियों वार्तालाप की शिष्टता मानव को आदर का पात्र बनाती है मधुर वाणी सुनने वाले व्यक्ति को प्रसन्न कर देती है जिससे समाज में उस व्यक्ति की सफलता के लिए रास्ता आसान हो जाता है। जबकि कटु वाणी सुनने वाले व्यक्ति को रुष्ट कर देती है, जिससे अकारण ही उस व्यक्ति के कई शत्रु जन्म ले लेते है जो व्यक्ति की सफलता का मार्ग अवरूद्ध कर देते है।
मधुर वाणी सुनने वाले व्यक्ति के मन से क्रोध और घृणा की भावना भी खत्म हो जाती है। छोटे से छोटे व बड़े से बड़े कार्य जो बड़े-बड़े सूरमा भी नहीं कर पाते, वे केवल वाणी के माधुर्य से संपन्न हो जाते हैं। मधुर वाणी के महत्व का सबसे बड़ा उदाहरण कोयल और कौवा हैं। दोनों का रंग काला होते हुए भी मधुर वाणी की वजह से सभी कोयल को स्नेह करते हैं, और उसे शुभ मानते हैं।
इतना महत्वपूर्ण विषय नीति शास्त्र के गुरु आचार्य चाणक्य से कैसे बचा रह सकता है। तो आइए आज की चर्चा प्रारंभ करते है। और जानते है कि आचार्य ने अपनी पुस्तक चाणक्य नीति में मधुर वाणी को लेकर कौन सी नीतियां बताई है।
आचार्य ने अपनी पुस्तक चाणक्य नीति में बताया है कि सिर्फ मधुर वाणी से पूरे संसार को अपने वश में कर सकते है। आचार्य कहते है कि यह संसार विष से भरा है अर्थात संसार में हर जगह कड़वाहट और नफरत भरी है। मधुर वाणी से संसार में फैली नफरत को बहुत कम कर लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर सकते है।
चाणक्य नीति की अध्याय 16 श्लोक 18 के अनुसार संसार एक कड़वा वृक्ष है, इसके दो फल ही अमृत जैसे मीठे होते है। एक मधुर
वाणी और दूसरी सज्जन जनों की संगति।
चाणक्य के अनुसार अगर आप इस संसार में फैली नफरत को कम करना चाहते है तो इसके 2 ही रास्ते है
1. मधुर वाणी
2. सज्जन लोगो की संगति
मधुर वाणी अमृत के समान होती है आपकी मधुर वाणी से आपका मन तो शीतल होता है साथ ही दूसरे लोगो का मन भी शीतल करता है
कहा जाता है कि हम उन 5 लोगों का औसत होते है जिनके साथ हम ज्यादा समय बिताते है। अतः हमे समाज के अच्छे लोगो को चुनकर उनके साथ अपना ज्यादा समय बिताइए। सज्जन लोगो की संगति से हम अपनी कई कमियों को दूर कर अपने जीवन को अच्छी आदतों से भर देगी। जिससे हम सफल हो जायेंगे।
अच्छे लोगो की संगति के बारे में दूसरी वीडियो सीरीज में बात करेंगे नही तो हम अपने विषय से भटक जायेंगे। इस विडियो सीरीज में हम केवल मधुर वाणी और मधुर वाणी के महत्व के बारे में बात करेंगे।
चाणक्य नीति की अध्याय 14 श्लोक 14 के अनुसार हे मनुष्य यदि तुम किसी एक ही कर्म के द्वारा सारे संसार को अपने वश में करना चाहता है तो निंदा करने वाली अपनी वाणी को वश में कर ले अर्थात निंदा करना छोड़ दे।
आचार्य के अनुसार अगर तुम पूरी दुनिया को अपने वश में करना चाहते हो तो लोगो की निंदा करना छोड़ दो। बल्कि अपनी मधुर वाणी से लोगो को अपने प्रति आकर्षित करो। मधुर वाणी में वह क्षमता है कि लोग अपने आप ही आपकी तरफ खींचे चले आते है। जिससे आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त हो जाता है।
अर्थात सिर्फ मधुर वाणी से ही पूरी को अपने।वश में किया जा सकता है। इसीलिए मधुर वाणी को अपनी सफलता के।लिए सबसे बड़ा हथियार बनाइए। वास्तव में वही व्यक्ति विद्वान होता है जो परिस्थितियों को भाप कर उसी के अनुकूल बात करे।
चाणक्य नीति की अध्याय 14 श्लोक 15 के अनुसार जो अवसर के अनुकूल बात करना जानता है, जो अपने यश और गरिमा के अनुकूल मधुर-भाषण कर सकता है और जो अपनी शक्ति के अनुसार क्रोध करता है, उसी को वास्तव में विद्वान कहा जाता है।
व्यक्ति के बात करने के तरीके से उसका आचरण, उसके परिवार की सभ्यता, उसके समाज की सामाजिक स्थति और उसके गुरु के द्वारा दी गई शिक्षा का ज्ञात होता है। व्यक्ति के।द्वारा निकले गलत शब्द व्यक्ति का, उसके।परिवार का, उसके समाज का और उसके गुरु का अपमान करवाते है। अतः व्यक्ति को बहुत ही सोच समझ कर बात करना चाहिए।
आचार्य के अनुसार व्यक्ति को अवसर के अनुकूल अपने यश और गरिमा के अनुसार ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिससे वह दुसरो को अपनी और आकर्षित कर सके। जो व्यक्ति समय और शक्ति के अनुसार मधुर वाणी बोलना जनता है वास्तव में वही विद्वान है। जबकि जो व्यक्ति समय के अनुसार बात नही करता शक्ति से ज्यादा क्रोध करता है और कटु वचन बोलता है वह वास्तव में मूर्ख है।
क्योंकि व्यक्ति अपनी शक्ति से ज्यादा क्रोध करेगा तो उस व्यक्ति को सामाजिक आर्थिक और शारीरिक रूप से बहुत नुकसान उठाना पड़ सकता है। जैसे आम आदमी किसी राजा के सामने क्रोध करेगा तो उसे दंड भोगना ही पड़ेगा। व्यक्ति की मधुर वाणी से लोग प्रसन्न रहते है।
चाणक्य नीति की अध्याय 16 श्लोक 17 के अनुसार मधुर बोली वाले सभी प्राणी सदैव प्रसन्न रहते है अतः व्यक्ति को सदैव प्रिय वचन ही बोलना चाहिए उसे चाहिए कि वाणी में अमृत रूपी मधुरता घोल कर बोले। व्यक्ति को वाणी से दरिद्र नही होना चाहिए।
चाणक्य के अनुसार व्याक्ति की मधुर वाणी से सभी प्राणी सदैव प्रसन्न रहते है अतः व्यक्ति को सदैव प्रिय वचन बोलना चाहिए। वैसे भी किसी से दो शब्द मधुर वाणी बोल देने से किसी का कुछ जाता नही नही है इसीलिए व्यक्ति को मधुर वाणी बोलने से नही चूकना चाहिए।
चाणक्य नीति की अध्याय 7 श्लोक 16 के अनुसार स्वर्ग से इस संसार में आने वाले जीव के शरीर में चार बाते उसके चिन्ह के रूप में रहती है। अर्थात उसके चार प्रमुख गुण होते है। उनमें दान देने की प्रवृत्ति होती है। वह मधुर भाषी होते है। देवतावो की पूजा अर्चना करता है उनका आदर सत्कार करता है। विद्वान ब्राह्मणों को सदैव तृप्त अर्थात संतुष्ट रखता है।
चाणक्य नीति की अध्याय 7 श्लोक 17 के अनुसार इसी प्रकार नरक में रहने वाले जब देह धारण कर इस संसार में आते है तो वो देवताओं के विपरीत कार्य करते है। वे मधुर भाषी होने के बजाय क्रोधी स्वभाव के होते है। कड़वी बात कहते है वे निर्धन होते है अपने परिवार जनों तथा मित्रो से सदैव द्वेष भाव रखते है उनकी संगति में सदैव नीच लोग रहते है वे नीच कुल वालो की सेवा करते है।
चाणक्य नीति की अध्याय 7 श्लोक 20 के अनुसार वाणी की पवित्रता मन की शुद्धि इंद्रियों का संयम प्राणी मात्र पर दया धन की पवित्रता मोक्ष प्राप्त करने वाले के लक्षण होते है।
नीȱत Āंथǂ मƶअÉयाÆम सेसंबंȲधत Ȋोकǂ का आना कुछ पाठकǂ को खटक सकता
है। उÊहƶऐसा लगेगा मानो आचायµ अपनेलÛय सेभटक गए हƹ। लेȱकन ऐसा समझना
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ĒÆयेक मƶवह रची-बसी है। जƞरत हैउसका अनुभव करनेकɡ। आचायµनेउस अनुभव के
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जो Ơसरǂ को Ɵखी देखकर Ɵखी होता होगा वही ȱववेकवान्हो सकता है। परोपकार कɡ
भावना हो, लेȱकन इंȰďयǂ पर संयम न हो, तो भी अपनेलÛय को पाया नहƭ जा सकता। एक
Ȯ×थȱत ĒाËत करनेके बाद मागµसेभटकनेका भय बना रहता है। संयमी तो वहां ×वयं को
संभाल लेता है, जहां इंȰďय लोलुप उलझ जाता है। ȱबना ȱववेक के सÆय का ´ान नहƭ होता
और उसके ȱबना बंधनमुǣ भी नहƭ Ɠआ जा सकता।