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सही या गलत आदत कैसे चुने


जय श्री कृष्णा, साथियों, आशा है आप सभी साथी कुशल मंगल से होंगे। हम अपनी इस सीरीज में काल्पनिक कहानियों के माध्यम से भगवद गीता का मानव जीवन में क्या उपयोग है यह समझाने का प्रयास करते है। इससे कही न कही आप खुद को भगवद गीता से जोड़ पाएंगे और इस महान पुस्तक का अपने जीवन में उपयोग कर अपनी जीवन यात्रा को सुखमय बना सकेंगे। इसी सीरीज में आज की कहानी में हम सीखेंगे कि हम यह कैसे जाने कि कौन से आदत अच्छी है और कौन सी आदत बुरी। तो आइए आज की कहानी प्रारंभ करते है। 



रोज शाम को गुरुजी और उनके साथी अध्यापक चाय की एक दुकान पर मिलते है। जिससे छोटी मोटी सोशल गैदरिंग हो जाती है। इस मीटिंग में स्कूल से रिलेटेड किसी प्रॉब्लम पर बात करना मना होता है। जब 4 साथी कही इकट्ठा होते है तो कभी हंसी मजाक होती और और कभी किसी विषय पर बहस हो जाती है। आदतन गुरु जी किसी भी बहस से दूर ही रहते है क्योंकि बहस दिलो को ठेस पहुंचाती है।

 लेकिन आज की बहस कुछ ज्यादा ही तीखी हो गई। हुआ यू कि आज अनिल जी ने सुनील जी को शराब पीने से मना किया और कहा कि शराब पीना बहुत बुरी आदत है तुम शराब पीकर बहक जाते हो इसीलिए तुम इस आदत को छोड़ दो।  अब कोई किसी शराबी से शराब पीने से मना करेगा  तो शराबी को बुरा लगेगा ही। इस पर सुनील जी अनिल जी को शराब पीने की अच्छाइयां गिनाने लगे। बताने लगे कि शराब शरीर के लिए सेनिटाइजर का काम करता है करोना काल में इस शराब ने कई लोगो की जान बचाई थी। अगर शराब इतनी ही बुरी होती तो सरकार शराब पर रोक लगा देती। मैं तो शराब पीना नहीं छोड़ सकता। 

बहस और बढ़ी और बढ़ते बढ़ते अच्छी और बुरी आदत के बीच में जाकर अटक गई। अनिल जी किसी आदत को अच्छी आदत कहते तो सुनील जी उसी आदत की बुराइयां गिनाने लगते।  जैसे किसी पुस्तक में लिखा है कि झूठ बोलना पाप है और किसी पुस्तक में यह भी लिखा है कि अगर किसी झूठ से किसी का भला हो जाता है तो वह झूठ सैकड़ों सच से भी  ज्यादा अच्छा है। इसी तरह कई पुस्तकों में लिखा है कि जीव हत्या पाप है लेकिन सैनिकों को देश की रक्षा करने के लिए कई बार दुश्मनों को मारना ही पड़ता है। इससे जीव हत्या होती है। ऐसे न जाने कितनी ही बातें उस बहस के दौरान हुई। फिर सुनील जी ने अनिल जी से कहा कि तुम डिसाइड करोगे कि कौन सी आदत अच्छी है और कौन सी बुरी। आज सुनील जी तो अनिल जी पर बहुत गुस्सा थे  ऐसा लगा कि कही दोनों में मार पीट न हो जाए। 

इसी बीच रमेश जी ने गुरु जी का नाम लेकर पूछा यार तुम कहते हो कि भगवद गीता में हर सवाल का जवाब है तो तुम ही बताओ कि इस परिस्थिति के लिए  भगवद गीता में क्या लिखा है। रमेश जी की बातों में जिज्ञासा कम और व्यंग ज्यादा था।  गुरु जी ने मुस्कुराते हुए कहा कि सही कहा आपने भगवद गीता में हर सवाल का जवाब है आपकी इस प्रश्न का भी उत्तर है। अच्छी और बुरी आदतों के बारे में सदियों से महाभारत हो रही है। कोई आदत किसी को अच्छी लगती है तो वही आदत किसी को बुरी भी लग सकती है। इसीलिए यह कैसे पता लगे कि कौन सी आदत अच्छी है या बुरी। इसके लिए भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता में कहा है 

तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः 

अर्थात गुरु के पास जाकर सत्य को जानो। विनम्र होकर उनसे ज्ञान प्राप्त करने की जिज्ञासा प्रकट करते हुए ज्ञान प्राप्त करो और उनकी सेवा करो। ऐसा सिद्ध सन्त तुम्हें दिव्य ज्ञान प्रदान कर सकता है क्योंकि वह परम सत्य की अनुभूति कर चुका होता है।

इसी बात को  आचार्य चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति में इस तरह लिखा है। 

धन्या द्विजमयी नौका विपरीता भवार्णवे ।
तरन्त्यधोगताः सर्वे उपरिष्ठाः पतन्त्यधः ॥

अर्थात वह लोग धन्य है, ऊँचे उठे हुए है जिन्होंने संसार समुद्र को पार करते हुए एक सच्चे ब्राह्मण की शरण ली. उनकी शरणागति ने नौका का काम किया. वे ऐसे मुसाफिरों की तरह नहीं है जो ऐसे सामान्य जहाज पर सवार है जिसके डूबने का खतरा है।

इन श्लोक के अनुसार हम में किसी के पास भी अपना जीवन उसके हालात, उतार चढ़ाव, जीवन में मिलने वाले दोस्त या दुश्मन तय करने का अधिकार नहीं है। लेकिन इस लाइफ को कैसे जीना है यह चुनने का हक सबके पास है।  बुरी आदतों से भरी जिंदगी आखिरी तक बहुत भारी हो जाती है। उसका बोझ उठाना आत्मा के लिए भी मुश्किल हो जाता है। इसीलिए बहुत सोच समझ कर अपने व्यवहार को चुनना चाहिए। क्योंकि उसी से हमारी आदतें बनती है। बाद में यही आदतें अच्छे या बुरे गुणों में बदल जाती है। भगवान सभी को अपनी इच्छा से अच्छी या बुरी आदत चुनने की आजादी देते है। उसके बाद यह इंसान के विवेक पर निर्भर करता है कि वह कौन सी राह चुनता है। जब हम खुद से न तय कर पाए तो हमे किसी ऐसे इंसान की मदद लेनी चाहिए जिसे इस बारे अच्छी तरह से पता हो। जो उस विषय का स्पेशलिस्ट हो। 


अब रमेश जी ने कहा मान गए गुरु। आपके पास हर सवाल का जवाब है। इस पर गुरु जी ने कहा मेरे पास नहीं भगवद गीता के पास। अब रमेश जी ने कहा यार आपके पास एक भगवद गीता एक्स्ट्रा हो तो प्लीज मुझे भी एक दे दीजिए। मैं भी इसे पढ़ना चाहता हूँ। और अब यह भी बता दीजिए कि शराब पीना अच्छी आदत है कि बुरी आदत। इस पर गुरु जी ने कहा श्लोक के अनुसार पहले मेरे पैर छूकर आशीर्वाद लो मेरी थोड़ी सेवा करो और मेरे लिए कोल्डड्रिंक और समोसा ले कर आओ। फिर बताऊंगा।  इस पर सुनील जी अनिल जी के साथ सभी लोग हंसने लगे। 

साथियों इसी के साथ आज की कहानी यही समाप्त होती है अगर कहानी अच्छी लगी हो तो वीडियो को शेयर कर भगवद गीता के प्रचार प्रसार में हमारा सहयोग कीजिए। राधे राधे