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दुःख क्यों होता है?


दुःख क्यों होता है? lifelessonsbyguruji, Bhagwad Geeta motivation story

भगवद गीता से लोगों की समस्या का समाधान का मार्ग बताने के कारण गुरु जी की पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ रही थी जिस कारण अब दिन में कई लोग उनके पास अपनी समस्या लेकर आने लगे थे। स्कूल में बच्चों की पढ़ाई पर कोई विपरीत असर न पड़े इसीलिए अब गुरु जी स्कूल में किसी से भी मिलना बंद कर दिया था।

जब चाय की दुकान पर लोगों से मिलने लगे तो साथियों ने कहा कि अपनी ये बकवास यहां न किया करो तुम्हारे चक्कर में कई लोगो को एक्स्ट्रा चाय पिलानी पड़ती है। गुरु जी समझ गए वास्तव में उनकी समस्या एक्सट्रा चाय नहीं है बल्कि लोगों से मिलने के कारण गुरु जी अब साथियों को समय नहीं दे पा रहे थे। खैर गुरु जी अब सबसे घर पर ही मिला करते थे। 

ऐसे ही एक दिन गुरु जी अपने घर पर थे तभी उनके घर के सामने एक कार आकर रुकी। कार से एक बुजुर्ग व्यक्ति उतरे और गुरु जी से पूछा कि मुझे गुरु जी से मिलना है जो इस स्कूल में पढ़ाते है और लोगों की समस्या का समाधान करते है। गुरु जी ने अभिवादन के बाद उनसे कहा कि मैं ही वह गुरु जी हू जो इस स्कूल में पढ़ाता हु लेकिन अंकल मैं किसी की समस्या का समाधान नहीं करता बल्कि लोग मेरे पास समस्या लेकर आते है तब मैं उन्हें भगवद गीता से उनकी समस्या के समाधान का सबसे अच्छा मार्ग बताता हु उसके बाद लोग स्वतंत्र होते है कि वह मेरे बताए गए मार्ग पर अमल करे या न करे। वैसे अधिकतर लोग मेरे बताए गए मार्ग पर अमल करके संतुष्ट ही हुए है। और अंकल दूसरी अहम बात कि आप मुझसे उम्र में बहुत बड़े है आप मुझे गुरु जी न कहिए आप मेरा नाम ले सकते है। मेरा नाम यह है। 

बुजुर्ग व्यक्ति बोले बेटा सबसे पहले बिना बताए आने के लिए माफी चाहूंगा मेरे पास तुम्हारा मोबाइल नंबर नहीं था। तो सोचा सीधे तुम्हारा घर ढूंढ कर तुमसे मिलु। तुम्हारे बताए गए मार्ग सही होते है इसीलिए मैं भी तुम्हारे पास आया हूं मेरी एक समस्या है पहले तुम वचन दो कि तुम किसी से मेरी समस्या के बारे में नहीं बताओगे।

गुरु जी ने कहा अंकल आप निश्चिंत रहिए मेरे पास से सबकी समस्या गुप्त रहती है आप निश्चिंत होकर अपनी समस्या मुझे बता सकते है।

बुजुर्ग व्यक्ति बोले मेरा नाम प्रेम किशोर तिवारी है तुम्हारे इलाके में तिवारी एंड संस नाम की जो फैक्ट्रियां है वह मेरी ही है। मैने अपने दम पर फैक्ट्री जमाई है। मेरे पिताजी की एक छोटी सी दुकान थी। जिसमे मेहनत करके पिताजी ने हम दो भाइयों की पढ़ाई लिखाई अच्छे से की। पढ़ाई पूरी करने के बाद पिताजी के पसंद की लड़की से हम दोनो भाइयों की शादी हुई। तब तक हम दोनों भाइयों ने मेहनत करके एक और दुकान ले ली थी उसके बाद पिताजी ने हम दोनो भाइयों के बीच में संपत्तियों का बंटवारा कर दिया 

पिताजी ने मुझे नई दुकान दी जो कम चलती थी लेकिन क्या मजाल कि मैंने उनसे कभी इस बात का जिक्र भी किया हो। हमारे समय में माता पिता का इतना सम्मान करते थे कि अगर पिता जी ने कह दिया कि यह काम होगा तो बच्चों की हिम्मत नहीं होती थी कि बच्चे उनके अगेंस्ट चले जाए। आज जमाना कितना खराब हो गया है लोग अपने माता पिता का बिल्कुल भी सम्मान नहीं करते। उनकी बात को बिल्कुल नहीं मानते है। 

शादी के बाद मेरे भी 2 बेटे हुए मेरी बहुत इच्छा थी मैं अपने बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनाऊं इसके लिए मै दुकान में बहुत मेहनत करता था ताकि पैसे की वजह से बच्चों की पढ़ाई में कोई दिक्कत न आए। लेकिन बच्चों ने मेरी बात नहीं सुनी और पढ़ाई से दूर भागते थे। किसी तरह उन लोगों ने हाइ स्कूल पास किया उसके बाद स्कूल न जाकर दुकान पर बैठने लगे। मैं बच्चों को बहुत डांटता मारता था लेकिन बच्चों को मेरी बात नहीं माननी थी तो नहीं मानी। मेरी पत्नी ने पहले बच्चों को पढ़ने के लिए समझाया और फिर मुझे की बच्चे नहीं पढ़ना चाहते है तो आप क्यों जिद्द कर रहे है। खैर मैने wife की बात मानी और अपनी इस इच्छा को अपने सीने में ही दबा दिया। 

उसके बाद जब बच्चों की शादी की बात आई तब मैने अपने बड़े बेटे के लिए अपने ही एक मित्र की लड़की को पसंद किया था और अपने मित्र को जबान दे दी थी लेकिन लड़के ने यहां भी मुझे नीचा दिखाया और अपने मन पसंद की लड़की से शादी करने को कहने लगा। मैने दबाव बनाया तो उसने जहर खा लेने की धमकी दे दी। फिर मैने हार कर उसकी बात मान ली। यहां भी बच्चों ने मेरी बात नहीं मानी। खैर किसी तरह मेरे छोटे लड़के ने शादी अरेंज की। 

परिवार को चलाने को लेकर भी लड़के मेरे बात नहीं मानते इसी कारण आज दोनों लड़कों की बहुओं से नहीं बनती। रोज कुछ न कुछ खटर पटर लगी रहती है। गृह कलह से मेरा घर से जी ऊब गया है। फैक्ट्री जाता हु वहां कुछ कमी दिखाई देती तब बच्चों से कुछ कहता हूं 10 बात कहता हु तब किसी 1 बात पर ध्यान देते है। इसीलिए अब फैक्ट्री जाने का मन नहीं करता। वाइफ के न रहने के बाद अब मेरी दिल की बात सुनने वाला कोई नहीं है। मैं अब बहुत दुखी रहता हूं। बेटा बताओ अब मैं क्या करू।

गुरु जी ने कहा अंकल मैं आपसे जो कुछ कहूं भले आप उस पर अमल करे या न करे लेकिन प्लीज आप मुझ पर गुस्सा नहीं करें। अंकल जीवन विकास हमेशा चलता रहता है यह हमेशा रहेगा कि आपकी अगली पीढ़ी अपनी पुरानी पीढ़ी से किसी न किसी बात पर अलग होगी। इस पर नई पीढ़ी किसी को दोष देना सही नहीं है। आपकी परेशानी की वजह है बच्चों से आपकी इच्छाएं। जिस दिन आपकी इच्छाएं खत्म हो जाएंगी उस दिन से आपका दुख खत्म हो जाएगा। इच्छा ही हमारी दुख का प्रमुख कारण है जैसा कि भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता में कहा है।  

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।सङ्गात् संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते।।2.62।।


अर्थात विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उसमें आसक्ति हो जाती है। आसक्ति से इच्छा और इच्छा से क्रोध उत्पन्न होता है।


हम जिस व्यक्ति से लगाव लगाते है उससे हम उम्मीद लगा ही लेते है इसीलिए हमे लोगो से अत्यधिक लगाव नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि लगाव से हर समय इच्छा जन्म लेती है और जब हमारी इच्छा पूरी नहीं होती है तब हमारा मन दुखी हो जाता है और हमें गुस्सा आती है। अर्थात हमारी गुस्सा का कारण दूसरों से लगाई गई हमारी इच्छाएं ही है।

हम उसी से इच्छा करते है जिनसे हमे लगाव होता है ऐसा न होता तो हम हर किसी से इच्छाएं लगाते। जब कोई हमारी इच्छा पूरी नहीं करता तो हमे दुख होता है। कई बार तो सामने वाले को पता नहीं होता कि हमने उससे क्या इच्छाएं लगा रखी है। 

आप भी अपने बच्चों से इच्छाएं लगाना बंद कर दीजिए। उनकी लाइफ है वह जैसे बिताना चाहते है उन्हें बिताने दीजिए। आप अपना समय उन कामों में लगाइए जिसमें आपको सुकून मिलता है। खुद को उनसे थोड़ा अलग कीजिए। जिससे आपका लगाव उनसे कम हो सके। भगवान की कृपा से अभी आपका शरीर काम कर रहा है बेहतर है सब मोह माया छोड़ कर तीर्थ यात्रा में अपना समय बिताइए। वहां जाकर भगवान से अपना दुख दर्द बांटिए भगवान जरूर आपको सुख और शांति प्रदान करेंगे। 

इस बात पर तिवारी जी बहुत संतुष्ट दिखे और अपने घर की तरफ चल दिए। कुछ दिनों तिवारी जी खुद गुरु जी को  महाकाल का प्रसाद देने आए। आज वह बहुत खुश दिख रहे थे।

साथियों इसी के साथ आज की कहानी यही समाप्त हुई राधे राधे

An old Man have a small shop. Old man working hard in it, old man  old man have two child one 8 year and other 6 year.  15 year after Child After completing  education studies, both  got married to the girl of my father's choice. By then, both of  brothers had worked hard and bought another shop. After that, my father divided the property between us two brothers.

Father gave me a new shop which was not doing well but I never dared to mention this to him. In our times, parents were respected so much that if the father said that this work will be done, the children did not have the courage to go against them. Today the times have become so bad, people do not respect their parents at all. They do not listen to them at all.

After marriage I too had 2 sons. I had a strong desire to make my children doctors or engineers. For this I used to work very hard in the shop so that the children do not face any problem in their studies due to lack of money. But the children did not listen to me and ran away from studies. Somehow they passed their high school and after that they started sitting in the shop instead of going to school. I used to scold and beat the children a lot but the children did not want to listen to me so they did not listen. My wife first explained to the children to study and then to me that if the children do not want to study then why are you being stubborn. Anyway, I listened to my wife and suppressed this desire within my heart.

After that, when it came to the marriage of the children, I had chosen the daughter of one of my friends for my elder son and had given my word to my friend, but the boy humiliated me here too and asked me to marry the girl of his choice. When I put pressure on him, he threatened to consume poison. Then I gave up and agreed to his demand. Here too the children did not listen to me. Anyway, somehow my younger son arranged the marriage.

The boys don't listen to me even regarding running the family. This is the reason why both the boys do not get along with their daughters-in-law. Everyday there is some or the other quarrel. I am bored of being at home because of the domestic strife. I go to the factory and if I find something lacking there, I tell the children something, I say ten things, then they pay attention to one thing. That is why I don't feel like going to the factory now. After my wife's death, there is no one to listen to what I have in my heart. I am very sad now. Son, tell me what should I do now.


चिंता 

आज गुरु जी ट्रेन से अपने गांव जा रहे थे तभी उन्होंने देखा कि उनके सामने वाले बर्थ पर एक भाई साहब अपनी पत्नी के साथ सफर कर रहे थे, भाई साहब बार बार अपने समान को चेक कर रहे थे। गुरु जी से रहा नहीं गया तो उन्होंने