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chankya niti karm bhoomi

नमस्कार साथियों, आपका स्वागत है life Lessons के माध्यम से अपने जीवन को सफल और सुगम बनाने वाले अपने अभियान में। 

साथियों आपने समाज में देखा होगा कि कोई व्यक्ति जब किसी स्थान पर रहता है तो न वह आजीविका कमा पाता है और न ही उसके सम्मान में वृद्धि होती है लेकिन जब वही व्यक्ति जैसे ही दूसरे स्थान पर निवास करता है तो मात्र स्थान बदलने से वह व्यक्ति अमीर होकर सफल हो जाता है जिससे उस व्यक्ति के मान सम्मान में वृद्धि हो जाती है। तब हम कहते है कि वह स्थान उस व्यक्ति की लिए बहुत भाग्यशाली साबित हुआ। इसीलिए स्थान विशेष का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है। 

अतः व्यक्ति को अपनी आजीविका का स्थान अर्थात अपनी कर्म भूमि चुनते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। इस संदर्भ में आचार्य चाणक्य की पुस्तक चाणक्य नीति आपकी बहुत सहायक सिद्ध हो सकती है।   

आचार्य चाणक्य ने अपनी पुस्तक चाणक्य नीति में बताया है कि व्यक्ति को किस स्थान पर रहना चाहिए और किस स्थान छोड़ कर दूसरे स्थान पर चले जाना चाहिए। आइए आज हम इसी विषय पर चर्चा प्रारंभ करते है और समझते है कि आचार्य चाणक्य ने किस स्थान को छोड़ कर जाने को कहा है और किस स्थान को निवास के लिए उत्तम बताया है। 

इस संबंध में हम आचार्य के तीन श्लोक पर चर्चा करेंगे और फिर सम्मिलित रूप से आचार्य के भाव को समझेंगे।

चाणक्य नीति की अध्याय 1 श्लोक 8 के अनुसार जिस देश में आदर सम्मान नही है और न ही आजीविका का कोई साधन है, जहां कोई बंधु-बांधव, रिश्तेदार भी नही है तथा किसी प्रकार के विद्या और गुण की प्राप्ति की संभावना भी नही है ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए, ऐसे स्थान पर रहना उचित नहीं है। 

अर्थात आचार्य ने कहा है कि किसी भी कारण वश ऐसे देश या स्थान पर निवास कर रहे है जिस देश या स्थान में सम्मान न हो, आजीविका का साधन न हो, अपने सगे संबंधी और रिश्तेदार न हो,और ज्ञान प्राप्त कर अपने गुणों में बढ़ोत्तरी का साधन न हो, ऐसे देश या स्थान को छोड़ देना चाहिए वहा निवास नही करना चाहिए। आइए अब दूसरे श्लोक पर चर्चा करते है। 

चाणक्य नीति की अध्याय 1 श्लोक 9 के अनुसार जहां ब्राह्मण, राजा, धनिक, नदी और वैध ये पांच चीजे नही हो इस स्थान में मनुष्य को एक दिन भी नही रहना चाहिए।

अर्थात आचार्य कहते है कि जिस स्थान पर यह पांच चीजे ब्राह्मण, राजा, धनिक, नदी, और वैध न हो ऐसे स्थान पर एक दिन भी नही रहना चाहिए। आइए अब इन्हें विस्तृत रूप से समझते है कि आचार्य ने ऐसा क्यों कहा।

ब्राह्मण - ब्राह्मण ज्ञान का प्रतीक है और वह ज्ञान देने के कारण गुरु होते है । उनसे ज्ञान प्राप्त कर हम अपने जीवन में सफल हो सकते है। अतः हमे ऐसे स्थान पर रहना चाहिए जहां निरंतर ज्ञान की प्राप्ति हो।

राजा - बुद्धिमान राजा सुरक्षित कानून व्यवस्था का प्रतीक है अतः बुद्धिमान राजा शांति पूर्वक जीवन यापन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज के परिवेश में राजा से आशय उस देश का प्रधान मंत्री या मुख्य मंत्री। व्यक्ति को ऐसे स्थान पर रहना चाहिए जहा का मुख्य मंत्री या प्रधान मंत्री मूर्ख न हो।

धनिक - धनिक व्यक्ति अपने धन के माध्यम से व्यापार करते है जिससे बहुत से लोगो को आजीविका का साधन उपलब्ध होता है। आजीविका व्यक्ति को सुख पूर्वक जीवन यापन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अतः ऐसे स्थान को चुने जहा अधिक संख्या में धनिक निवास करते है। 

नदी - नदी जल का प्रतीक है। और जल हमारे जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसीलिए तो कहा जाता है जल ही जीवन है। चाणक्य नीति की यह बात उस समय की है जब जल के लिए व्यक्ति मात्रा नदी पर आश्रित था। लेकिन आधुनिक समय में व्यक्ति जल के लिए केवल नदी पर आश्रित नहीं है जल के और भी बहुत से साधन उपलब्ध है। इसीलिए अब व्यक्ति के लिए नदी उतना महत्वपूर्ण नही है।

वैध - हमारा शरीर एक मशीन की तरह है और इसमें कब कोई समस्या आ जायेगी इसका पूर्वानुमान नही लगाया जा सकता है। अतः व्यक्ति को ऐसे स्थान का चुनाव करना चाहिए जहा हर समय वैध या डॉक्टर उपलब्ध हो। जिससे समस्या आने पर समुचित इलाज मिल सके।

 अब एक अन्य श्लोक को देखते है 

चाणक्य नीति की अध्याय 1 श्लोक 10 के अनुसार जहां आजीविका चलाने का साधन न हो, व्यापार आदि विकसित न हो किसी प्रकार के दंड मिलने का भय न हो। लोक लाज न हो, व्यक्तियों में शिष्टता और उदारता न हो अर्थात दान देने के प्रवृत्ति न हो। जहा यह पांच चीजे विद्यमान न हो व्यक्ति को ऐसे स्थान पर निवास नही करना चाहिए।

इस श्लोक में आचार्य ने चुने हुए स्थान विशेष के समाज के बारे में जानकारी करने के कहा है और बताया है कि जहा आजीविका का साधन उपलब्ध न हो व्यापार विकसित न हो, लोग शिष्ट न हो लोगों को न तो लोक लाज का भय हो और न ही दंड मिलने का भय हो। व्यक्ति को ऐसे स्थान पर निवास नही करना चाहिए।

आइए अब हम तीनों श्लोक के सम्मिलित अर्थ को देखते है क्योंकि मैंने पहले के अपने वीडियो में बताया है कि एक श्लोक विशेष का अर्थ निकालने से अक्सर अर्थ का अनर्थ हो जाता है जैसा वर्तमान में महाकवि तुलसीदास की विश्व प्रसिद्ध ग्रंथ राम चरित मानस के साथ राजनीति हो रही है। यह प्रसंग अपने बात को साबित करने के लिए उठाया अन्यथा राजनीति हमारा विषय नहीं है। अब हम अपने विषय पर वापस लौटते है। इसीलिए हमे कई श्लोक का सम्मिलित अर्थ निकलना चाहिए। 

आचार्य ने बताया है कि अपनी कर्मभूमि चुनते समय निम्न बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए 

आय का साधन- आजीविका किसी व्यक्ति के जीवन का महत्व पूर्ण विषय है। आजीविका के कारण ही व्यक्ति जन्मभूमि को छोड़ कर दूसरे स्थान की ओर गमन करते है। अतः व्यक्ति को सर्वप्रथम यह जानकारी ले लेना चाहिए कि वह जिस स्थान जा रहा है वहां पर कौन कौन से आय के साधन उपलब्ध है। 

ज्ञान का साधन - ज्ञान व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण विषय है। अच्छे ज्ञान से व्यक्ति अपने गुण के साथ उसके आय में भी वृद्धि होती है। अतः व्यक्ति को जानकारी होनी चाहिए कि स्थान विशेष पर ज्ञान के साधन उपलब्ध है कि नही।

सगे संबंधी - व्यक्ति के सगे संबंधी और मित्र उसकी मुसीबत के वक्त काम आते है और कई बार उसे मुसीबत से बचा लेते है। अतः व्यक्ति को ऐसे स्थान को चुनना चाहिए जहा पर उसके सगे संबंधी और मित्र पहले से रहते है जो व्यक्ति का सही मार्ग दर्शन करे। और मुसीबत के समय व्यक्ति के काम आए। 


कानून व्यवस्था - कानून व्यवस्था व्यक्ति को शांति पूर्वक जीवन यापन के लिए महत्वपूर्ण है। अतः व्यक्ति को स्थान विशेष की कानून व्यवस्था की जानकारी ले लेनी चाहिए।

चिकित्सा के साधन - रोग मुक्त होकर व्यक्ति सुख पूर्वक और पीड़ा मुक्त जीवन यापन कर सकता है। अगर समय पर रोग का।पता चल जाए और उसका सही इलाज मिल जाए तो व्यक्ति बड़ी बीमारी से आसानी से बच सकता है। अतः व्यक्ति को ऐसे स्थान को चुनना चाहिए जहा चिकित्सा के अच्छे साधन उपलब्ध हो।

समाज - अच्छा समाज व्यक्ति और उसके बच्चो को सही दिशा प्रदान कर सकता है। अतः व्यक्ति को समाज का सही आकलन करना चाहिए की समाज शिष्ट है की नही, समाज को दंड का भय है कि नही और सबसे महत्वपूर्ण समाज को लोक लाज का भय है कि नही। क्योंकि अगर भय न हो तो व्यक्ति गलत काम करने मे संकोच नहीं करेगा । अतः इन बातो का सही आकलन कर ही स्थान का चुनाव करना चाहिए।

साथियों अगर आप आचार्य की इन बातो को ध्यान में रख कर अपनी कर्मभूमि का चुनाव करेंगे तो अपने जीवन को सफल बना कर सुख और शांति से अपना जीवन यापन कर सकेंगे। 

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