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जीवन के हर खेल में आपसी सामंजस कितना महत्व पूर्ण है


72 team work

जय श्रीकृष्णा साथियों, आशा है आप सभी साथी कुशल मंगल होंगे। इस चैनल पर हम पुस्तकों से मिलने वाले अमूल्य ज्ञान को काल्पनिक कहानियों के माध्यम से सभी साथियों के साथ शेयर करते है। जिससे आप खुद को कहानी में बताई गई परिस्थिति से जोड़ पाए और पुस्तक के संदेश को अपने जीवन में अपना कर अपनी जीवन यात्रा सुगम और सुखमय बना सके। इसी सीरीज में आज कहानी में समझेंगे कि टीम लीडर को कैसे अपनी टीम बनानी चाहिए और सफलता प्राप्त करने के लिए टीम को कैसे काम करना चाहिए तो आइए आज की वीडियो प्रारंभ करते है।

एक दिन गुरु जी अपनी बेटी का बॉलीबॉल का मैच देखने के लिए स्टेडियम गए थे वहां गुरु जी के बेटी की स्कूल की टीम बहुत अच्छा खेली लेकिन अंत में हार गई। जब गुरु जी अपनी बेटी से मिलने गए तब टीम के गेम्स टीचर ने कहा हम बहुत अच्छा खेले लेकिन जीत और हार हमारे हाथ में नहीं है। इस पर गुरु जी ने कहा कि आपने बहुत सही कहा कि आपके बच्चे बहुत अच्छा खेले लेकिन एक साथ नहीं खेले। आपकी टीम में आपस में सामंजस की कमी साफ दिखाई दे रही थी।

इस पर गेम्स टीचर ने कहा कि मैं कुछ समझा नहीं फिर गुरु जी ने कहा कि जीवन के खेल में आपसी सामंजस बहुत जरूरी होता है जैसा कि भगवद गीता में लिखा है 

देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः । 
परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ॥

अर्थात भगवान कहते है तुम लोग इस यज्ञ द्वारा देवताओं को उन्नत करो और वे देवता तुम लोगों को उन्नत करें। इस प्रकार निःस्वार्थ भाव से एक-दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे।

इस श्लोक के अनुसार हमें अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए। एक दूसरे का सहयोग करने से जीवन और मैच में सफलता प्राप्त करने में आसानी रहती है।

सर आपके पास बहुत अच्छे खिलाड़ी है लेकिन वह सब एक साथ नहीं खेल रहे थे जैसे आपके फॉरवर्ड खिलाड़ी जिन्हें एक दूसरे को गेंद को पास करना था वह भी आपस में गेंद को पास नहीं कर रहे थे और अकेले ही शॉट लगा रहे थे जिससे अच्छे शॉट नहीं बन रह थे जबकि दूसरे स्कूल के बच्चे कमजोर थे लेकिन वो सब एक दूसरे को सहयोग कर रहे थे उनका आपसी सामंजस बहुत बेहतरीन थे। जिस कारण वो लोग जीत गए।

इस पर गेम्स टीचर ने बताया कि हमारी टीम में अलग अलग क्लास के खिलाड़ी है जिससे उनमें आपसी सामंजस नहीं बन पा रहा है और फॉरवर्ड के दोनों खिलाड़ियों में कुछ दिन पहले किसी बात को लेकर आपस में मन मुटाव हो गया था इसीलिए ये दोनों एक दूसरे को पास नहीं दे रही थी। 

गुरु जी ने कहा है यही तो मैं कह रहा हु कि बच्चों को पर्सनल परफॉर्मेंस के बजाय बच्चों को टीम भावना से खेलना चाहिए। आपको भी टीम को बच्चे की योग्यता के अनुसार सेट करना चाहिए जैसे लंबे कद के बच्चों को आगे रखना चाहिए लंबे कद खिलाड़ी जंप लेकर अच्छा शॉट बना सकते है। जबकि वह बच्चे पीछे शॉट रोक रहे थे। और छोटे कद के खिलाड़ी विपक्षी टीम के तेज शॉट को आसानी से रोक कर अच्छा मूव बना सकते है। 
 
टीम के मुखिया की जिम्मेदारी है कि वो यह सुनिश्चित करे कि सभी सदस्यों को पहले यह पता होना चाहिए कि उन्हें वास्तव में क्या करना है? इससे वो सभी चीजें दूसरों को सही दिशा में सोचने में मदद करेंगी, अन्यथा, जब एक टीम स्पष्ट नहीं होती है तो वह अपने पर्सनल परफॉर्मेंस पर ज्यादा ध्यान देते है। जबकि जब आप किसी टीम में होते हैं तो आप टीम में अपने कर्तव्य का ध्यान रखते है और उसी के अनुसार अपने कार्य को पूरा करते है।
 
इसके अलावा जब आप किसी टीम में काम कर रहे होते हैं तो आपको हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपका अहंकार दूसरों के साथ ना टकराए क्योंकि सभी में कुछ न कुछ अहंकार होता है लेकिन जब वे किसी टीम में साथ काम कर रहे होते हैं तो अपने अहंकार को अलग रखते हैं। 

गुरु जी की बात गेम्स टीचर को समझ में आ गई फिर उन्होंने ने नई तरह से टीम को संगठित किया उसके बाद बेटी ने बताया कि उसकी टीम लगातार मैच जीत रही है।

 एक दिन उनकी बेटी ने बताया कि कल हमारा फाइनल मैच है गेम्स टीचर ने आपको मैच देखने के बुलाया है। गुरु जी मैच देखने के लिए स्टेडियम गए गुरु जी के बेटी की टीम अब बहुत अच्छा खेल रही थी उसने बड़ी आसानी से फाइनल मैच जीत लिया। मैच में बाद गेम्स टीचर गुरु जी मिलने आए और सबने ट्राफी सहित गुरु जी के साथ सेल्फी के कर गुरु जी का सम्मान किया। 

साथियों इसी के साथ आज की कहानी यही समाप्त होती है कहानी कैसी लगी कॉमेंट के माध्यम से जरूर बताइएगा। वीडियो को लाइक और शेयर कर भगवद गीता के प्रचार प्रसार में हमारा सहयोग कीजिए। राधे राधे।