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rakshabandhan

जय श्री कृष्णा साथियों, रक्षा बंधन का त्यौहार आने वाला है न जाने क्यों सभी त्योहारों में मुझे रक्षा बंधन का त्यौहार बहुत पसंद है। शास्त्रों में भाई-बहन के संबंध को अत्यंत पवित्र, प्रेमपूर्ण और कर्तव्यनिष्ठ बताया गया है। वेद, पुराण, स्मृति ग्रंथों, महाभारत और चाणक्य नीति जैसे शास्त्रों में इस विषय पर कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। आइए आज की वीडियो में शास्त्रों के अंतर्गत भाई बहन के रिश्ते पर चर्चा करते है।  


भाई बहन का रिश्ता हमेशा पवित्र रिश्ता माना गया है इस घोर कलयुग में जहां हर रिश्ते अपनी मर्यादा की सीमा लांघ गए है उसके बावजूद भी आज समाज की नजर में भाई और बहन का रिश्ता सबसे पवित्र रिश्ता माना जाता है। लोग जल्दी भाई बहन के रिश्ते पर संदेह नहीं करते। इसीलिए भाई बहन को हमेशा एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए जैसा कि ऋग्वेद में कहा गया है। 

“समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः।
समाना व ओ मनो यथा वः सुसहासति॥”

 अर्थात ऋग्वेद में भाई बहन के रिश्ते पर विचार करते हुए कहा गया है कि तुम्हारे विचार, दिल और भावनाएँ समान हों। तुम्हारा मन भी एक जैसा हो, जिससे तुम परस्पर स्नेह और सहयोग से रह सको। कहने का आशय है कि भाई-बहन का रिश्ता समान भावनाओं और सच्चे स्नेह पर आधारित होना चाहिए। जिससे दोनों एक दूसरे का सम्मान करे। 

हर माता पिता का यह कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों के बीच भेदभाव न करके उन्हें उचित और समान शिक्षा का प्रबंध करे जिससे वह समाज में सर उठा कर रह सके जैसा कि आचार्य चाणक्य ने कहा है 

माता शत्रुः पिता वैरी येन बालो न पाठितः !
न शोभते सभामध्ये हंसमध्ये बको यथा !!

अर्थात जो माता–पिता अपने बच्चो को पढ़ाते नहीं है ऐसे माँ–बाप बच्चो के शत्रु के समान है. विद्वानों की सभा में अनपढ़ व्यक्ति कभी सम्मान नहीं पा सकता वह वहां हंसो के बीच एक बगुले की तरह होता है.

अतः माता पिता का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को समान शिक्षा का प्रबंध करे जिससे समाज उनका सम्मान करे। जिस तरह से माता-पिता का कर्तव्य है शिक्षित करना, वैसे ही भाई-बहन का कर्तव्य है एक-दूसरे को उचित मार्ग दिखाना और उन्हें सहारा देना। भाई को चाहिए कि वह अपनी बहन के विवाह के लिए उचित वर का चयन करने मे उचित मार्ग दर्शन प्रदान करे। 

भाई बहन के रिश्ते के विषय में खोज करते समय मुझे इंटरनेट से यह दो श्लोक मिलें बहुत प्रयास करने के बावजूद भी मुझे इनके सोर्स के बारे कुछ पता न चल पाया, वैसे मैं इस तरह के श्लोक को अपनी चर्चा का हिस्सा नहीं बनाता हु लेकिन इन श्लोक का संदेश इतना प्रासंगिक हैं कि मुझे इन्हें अपनी चर्चा में शामिल करना पड़ा। अगर किसी साथी को इन श्लोक के सोर्स के बारे में कोई जानकारी हो कृपया कमेंट के माध्यम से अवश्य बताए। 

रक्षा बंधन के समय जब बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं तब भाई के लिए लंबी उम्र और वैभव की कामना करने के साथ अपने लिए रक्षा का वचन मांगते हुए खुद धर्म के मार्ग पर चलने का वचन देती है। 

त्वया संरक्षिता नित्यं, धर्ममार्गे स्थिता सदा।
दीर्घायुरस्तु मे भ्राता, यशस्वी भव सर्वदा॥

अर्थात 
तुम्हारी रक्षा में मैं सदा सुरक्षित रहूं और धर्म के मार्ग पर चलती रहूं।
हे भाई! तुम्हारी आयु लंबी हो, और तुम सदा यशस्वी बनो।

इसके बाद भाई बहन की रक्षा का वचन देता है।
स्नेहेन संयुक्तमिदं बन्धनं शुभम्।
रक्षां करिष्ये बहुसन्ततिं यथा विभुः॥

अर्थात 
यह भाई-बहन का पावन बंधन स्नेह से युक्त है।
मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा, जैसे भगवान अपनी संतानों की रक्षा करते हैं।

अर्थात भाई का यह कर्तव्य है कि वह बहन की रक्षा करे उसका मार्ग दर्शन करे इसी तरह बहन का भी कर्तव्य है कि वह सदैव धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने भाई के मार्ग दर्शन करे। 

साथियों इसी के साथ आज चर्चा यही समाप्त होती है आप सभी को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं। राधे राधे