जय श्री कृष्णा साथियों, कैसे है आप सब, आपके मेसेज से पता चला कि आप मुझे कितना मिस कर रहे थे इसके लिए मैं बहुत आभारी हूँ, मैं आज करीब 1 साल बाद वीडियो बना रहा हूँ । वीडियो के टाइटल और थंबनेल से आपको पता चल गया होगा कि मैं कहा बिजी था आज मैं उसी का अनुभव आपके साथ शेयर कर रहा हूँ
साथियों आज मैं जिस बात को शेयर कर रहा हूँ वह मेरा अपना खुद का अनुभव है आज अधिकांश लोग फिटनेस की समस्या से जूझ रहे है और मुझे पूरा यकीन है कि लोग मेरे अनुभव का लाभ उठा सकते है । मेरे बदले हुए फिटनेस को देख कर मेरे कुछ साथियों ने मेरे अनुभव के बारे में पूछा। अगर आपको लगता है आपका ज्ञान और अनुभव दुसरो के काम आ सकता है तो उसे अवश्य शेयर करना चाहिए । मैंने अपना अनुभव उन साथियों के साथ शेयर किया और मेरे अनुभव का सक्सेस रेट १०० % है।इसीलिए मुझे अपने अनुभव पर पूरा बिस्वास है । कोई भी इस अनुभव का फ़ायदा उठा सकता है इसीलिए आपके साथ अपने अनुभव पर इसीलिए चर्चा कर रहा हू। आख़िर आप लोग भी तो मेरा परिवार है।
अपने अनुभव पर चर्चा करने से पहले अपने बारे में थोड़ा बताना पड़ेगा तभी आप अपनी समस्या को मुझसे जोड़ कर देख पाएंगे।
मैं ४० वर्ष से अधिक उम्र का पुरुष हूँ जब मैं फिटनेस की समस्या से जूझ रहा था तब मेरा वजन 84 किलो से ज़्यादा था। मेरे पैरों के जोड़ो में दर्द भी रहता था जिससे मुझे चलने फिरने में बहुत समस्या आती था मैंने यह मान लिया था कि अब मैं बूढ़ा हो चुका हूँ और बुढ़ापे में ऐसी छोटी मोटी दिक्कते तो आती रहती है। लेकिन एक बार मुझे अपने वजन के कारण शर्मिंदगी उठानी पड़ी मउसी दिन मैंने ख़ुद से फ़ैसला किया था ख़ुद को फिट करूँगा।
उसके बाद जैसा कि मैं करता हूँ हर संभव जगह से इस संबंध में ज्ञान मिल सकता था वहाँ से ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश की चाहे वह फिटनेस कोच हो या बुक्स या फिर यूट्यूब वीडियो या फिर डॉक्टर्स, इनफार्मेशन कलेक्ट करने के समय मैंने जाना कि २० वर्ष की उम्र में फिट होने में और ४० के उम्र में फिट होने में बहुत अंतर है अंतर ना केवल फिट रहने के तरीके में है बल्कि फिट रहने के उद्देश्य में भी है जहाँ २० वर्ष का युवा बॉडी को दिखाने के लिए फिट रहता है
वही ४० की उम्र वाला व्यक्ति की इच्छा रहती है कि वह इतना फिट हो जाए कि उसे डेली के रूटीन कार्य बिना किसी परेशानी के कर सके और बुढ़ापे में कोई दिक्कत ना हो! मैंने भी इसी उद्देश्य से अपनी फिटनेस का रोडमैप बनाया । roadmap को ३ प्रमुख प्लान में बांटा। फिटनेस के टारगेट को पूरा करने में सभी प्लान का बराबर योगदान है आप किसी भी एक प्लान को स्किप नहीं कर सकते ये प्लान है
१ डाइट प्लान
२ ट्रेनिंग प्लान
३ रिकवरी प्लान
डायट प्लान में मैंने जाना कि आपको अपने भोजन के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि भोजन में कितनी कैलोरी है कितना प्रोटीन है और कितना अन्य न्यूट्रीशन है। आपको कैलोरी की पूरी जानकारी होनी चाहिये कि आप कितनी कैलोरी ले रहे है और आपको कितनी कैलोरी की आवश्यकता है। कितनी कैलोरी की जरूरत है इसके लिए आप गूगल कर सकते है गूगल में मोटा मोटा कैलोरी रिक्वायरमेंट बता देता है यह इग्ज़ैक्ट तो नहीं होता लेकिन एक अनुमान मिल जाता है इससे आपका काम चल जाएगा ।इसके बाद अपना वजन बनाये रखने के लिए जितनी कैलोरी की आवश्यकता है उससे २५० से ३०० ग्राम कम कैलोरी ले वजन बढ़ाने के लिए २५० से ३०० ग्राम कैलोरी ज़्यादा ले ।
इसके अलावा डाइट में प्रोटीन भी महत्वपूर्ण चीज है प्रोटीन से मसल्स बनती है जिससे शरीर मजबूत होता है इसीलिए कोशिश करे आप डाइट में अधिक से अधिक प्रोटीन ले। एक् बात का ध्यान रखें कि अपने डाइट में यह बदलाव बहुत धीरे धीरे करे अचानक डाइट में बहुत बड़ा बदलाव आपके शरीर में नेगेटिव प्रभाव डाल सकता है ।
मैं इस वीडियो में आपको कोई डाइट प्लान नहीं बताऊंगा । आप अपना बेस्ट डाइट प्लान ख़ुद बना सकते है जैसे मैंने बनाया था ।मैंने देखा कि मेरा लंच और डिनर तो ठीक था मैं बहुत सिंपल भोजन करता था इसीलिए लंच और डिनर में मैंने ज़्यादा परिवर्तन नही किया सिर्फ़ इस बात का फोकस किया कि लंच और डिनर क्या कैलोरी कम हो और प्रोटीन ज़्यादा हो।
असली प्रॉब्लम सुबह के ब्रेक फ़ास्ट और शाम के स्नैक्स में थी । इन दोनों समय मैं चाय के साथ कभी समोसे बिस्कुट या नमकीन ले लेता था जिसमे ज़्यादा कैलोरी होती है । इसीलिए इसमे मैंने परिवर्तन किया । सबसे पहले मैंने चाय को दूध से रिप्लेस कर दिया जिससे मेरी कैलोरी कम हुई और प्रोटीन का इंटेक भी बढ़ गया । दूध लेने का फ़ायदा यह भी हुआ कि चाय के साथ में जो फालतू चीजे जैसे समोसा बिस्किट लेता था वह भी ख़त्म हो गया । इस परिवर्तन ने ही मेरी डाइट की प्रॉब्लम को सुधार दिया
देखा सिर्फ़ एक छोटे से परिवर्तन ने मेरी डाइट को सुधार दिया।आप भी ऐसा कर सकते है। इसीलिए मैंने आपको डाइट प्लान नहीं बताया बल्कि व्यक्ति अपना बेस्ट डाइट प्लान ख़ुद बना सकता है फिर भी अगर आपको डाइट प्लान बनाने में कोई प्रॉब्लम हो तो कमेंट में अपनी डिटेल्स दे दीजिएगा मैं आपका बेस्ट डाइट प्लान बताने की कोशिश करूँगा।
अब बात करते है ट्रेनिंग प्लान की , ट्रेनिंग प्लान में दो महत्वपूर्ण बातें देखनी होती है कि कार्डिओ करे कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग । दोनों के अपने अपने फायदे और नुकसान है । इसीलिए मैंने दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की ।
कार्डिओ में मैंने सुबह वॉकिंग शुरू कर दी वॉकिंग में डेली ८००० से १०००० स्टेप का टारगेट रखा इसके साथ माउंटेन क्लाइम्बर्स जंपिंग जैक और स्किपर जैसी कार्डिओ वर्कआउट करता था कार्डिओ को मैंने ३० से ४५ मिनट का समय दिया। वॉकिंग से मुझे बहुत फायदा हुआ । मेरे मन में वर्कआउट करने की ताक़त मिली।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में मैंने पुश पुल एंड लेग वर्कआउट प्लान फॉलो किया,इसमें एक दिन पुश वर्कआउट दूसरे दिन पुल वर्कआउट और तीसरे दिन लेग का वर्कआउट करते है स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी डेली ३० मिनट से ४५ मिनट का समय दिया ।
पुश वर्कआउट में मैंने चेस्ट , सोल्डर् और ट्राइसेप्स को ट्रेन किया।
पुल वर्कआउट में मैंने बैक और बाइसेप्स को ट्रेन किया
और लेग वर्कआउट वाले दिन लेग और एब्स की ट्रेनिंग की।हर बॉडी पार्ट के २ compound वर्कआउट किए हर वर्कआउट के २ सेट और हर सेट में फेलियर तक जाता हूँ ।
मैं यहाँ पर आपको वर्कआउट प्लानके बारे में ज़्यादा नहीं बता पाऊँगा क्योंकि उसमे बहुत समय लगेगा इसीलिए उसके लिए अलग ही वीडियो बनानी पड़ेगी।
धीरे धीरे मैंने देखा कि मेरी बॉडी कार्डियो पर कम रिस्पांस कर रही है यहाँ तक की नेगेटिव प्रभाव डाल रही है कार्डिओ करने से मेरा वेट तो कम हुआ लेकिन साथ ही साथ मेरे मसल्स और स्ट्रेंथ भी कम हो गई। इसीलिए मैंने कार्डिओ को बहुत कम कर दिया । अब कार्डिओ में सिर्फ वॉकिंग करता हू।
सबसे महत्वपूर्ण बात आपको अपनी ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी में एक टारगेट लेकर चलना है बिना टारगेट के ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी में मोटिवेशन नहीं आता जैसे पहले मेरा टारगेट वेट एंड वेस्ट दोनों को कम करना था जिसे मैं हर संडे को track करता था वेट एंड वीस्ट का टारगेट मैंने लगभग ८ मंथ में अचीव कर लिया था जिससे फिटनेस लेबल अचीव हो गया इसीलिए अब मैंने अपना टारगेट चेंज कर लिया है। इसका टारगेट अचीव हो जाएगा तब मैं इस पर भी वीडियो बनाऊँगा। आप लोग कमेंट में दुआ कीजिए कि मेरा टारगेट जल्द अचीव हो जाए ।
अब आते है सबसे महत्वपूर्ण प्लान पर वह है रेस्ट एंड रिकवरी प्लान
चाहे हम जितना भी डाइट कंट्रोल कर ले जितना भी वर्कआउट कर ले अगर रेस्ट नहीं करेंगे कभी भी टारगेट अचीव नहीं कर सकते। ध्यान रखिए वर्कआउट ब्रेक्स मसल्स रेस्ट बिल्ड मसल्स । इसीलिए बीचबीच में रेस्ट लेते है जिससे बॉडी रिकवर होती है। बड़े बॉडी पार्ट जैसे लेग चेस्ट और बैक को रिकवरी करने में ४८ से ७२ घंटे चाहिए इसीलिए मेरा वर्कआउट प्लान ऐसा है की आपको उस बॉडी पार्ट को दुबारा ट्रेन करने कम से कम ७२ घंटे का रेस्ट मिल सके ।
रिकवरी में स्लीप के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है । कोच कहते है कि बॉडी स्लीप के दौरान ही बनती है इसीलिए डेली कम से कम ८ घंटे की गहरी नींद ले । ऐसे भी अगर आप वर्कआउट करेंगे स्ट्रेस कम लेंगे तो गहरी नींद आ ही जाएगी।
साथियों वर्कआउट वाला रास्ता बहुत लंबा है बहुत समय लगता है मेहनत भी बहुत लगाती है लेकिन जब आप टारगेट अचीव कर लेते है तब उस अचीवमेंट वाली खुशी को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
साथियों इसी के साथ वीडियो यही समाप्त होती है आज मैंने बहुत ही संक्षेप में पूरा प्लान बताया है जल्द ही मैं हर प्लान के लिए अलग अलग वीडियो बनाऊँगा इसीलिए जो साथी मुझसे नहीं जुड़े है सब्सक्राइब करके हमारे साथ जुड़ जाए
वीडियो को अंत तक देखने के लिए आपका धन्यवाद जल्द मिलेंगे अगले वीडियो में राधे राधे