साथियों
Aap paise kama sakte ho…
Body ko bhi strong bana sakte ho…
Lekin agar aapka man shaant nahi hai…
Toh aapko kuch bhi achcha nahi lagega
आपको यह बात इस कहानी से ज़्यादा समझ में आएगी
यह कहानी है रमेश और सुरेश की,
रमेश के अनुसार उसका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ
उसकी पढ़ाई लिखाई सरकारी स्कूल में हुई
पढ़ लिख कर वह बैंक में क्लर्क बन गया
आज उसकी शादी हों गई है
और उसके दो बच्चे भी है।
रमेश हमेशा इस दुख में रहता है कि
अगर उसका जन्म किसी अमीर परिवार में होता
और अगर उसकी पढ़ाई लिखाई किसी अच्छे स्कूल में हुई होती
तो वह पैसे वाला होता।
अब बात करते है सुरेश की
सुरेश के अनुसार उसका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ
उसके माता पिता ने अपने सामर्थ्य के अनुसार
उसका दाखिला पास के ही सरकारी स्कूल में करवा दिया
जहां रमेश ने बहुत मेहनत की।
और पढ़ाई पूरी करने के बाद
उसे एक बैंक में क्लर्क की जॉब मिल गईं
आज उसकी शादी हो गई है
और उसके दो बच्चे भी है
अब वह अपने परिवार के साथ सुखी से रहता है।
देखा साथियों दोनों कहानियों में परिस्थितियां बिलकुल सेम है
लेकिन रमेश दुखी रहता हैं और सुरेश सुखी।
अंतर सिर्फ सोच का है।
यही सोच हमे सुख और दुख देता है
यही बात भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण बताते है ।
भगवान कहते है
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥5॥
उद्धरे दात्मना त्मानं नात्मा नम वसादयेत् ।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरा त्मैव रिपु रात्मनः ॥5॥
अर्थात् मन की शक्ति द्वारा
अपना आत्म उत्थान करो
और स्वयं का पतन न होने दो।
मन जीवात्मा का मित्र
और शत्रु भी हो सकता है।
एक अन्य श्लोक में भगवान कहते है
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम्।।2.66।।
नास्ति बुद्धिर युक्तस्य न चायु क्तस्य भावना।
न चाभा वयतः शान्तिर शान्तस्य कुतः सुखम्।।2.66।।
अर्थात जिसके मन-इन्द्रियाँ संयमित नहीं हैं,
ऐसे मनुष्य की बुद्धि नहीं होती
और बुद्धि न होने से
उसमें कर्तव्यपरायणता की भावना नहीं होती।
ऐसी भावना न होने से उसको शान्ति नहीं मिलती।
फिर शान्तिरहित मनुष्य को सुख कैसे मिल सकता है?
साथियों आप वो बनते है जिसके बारे में आप ज्यादा सोचते है
अगर आप हमेशा नकारात्मक चीजों के बारे में सोचेंगे
तो हमेशा दुखी रहेंगे
और अगर वहीं सकारात्मक चीजों के बारे में सोचेंगे
तो सुखी रहेंगे।
इसीलिए मन को नियंत्रित कीजिए।
साथियों यह मन बड़ा चंचल है
कभी भी एक जगह ठहरता ही नहीं है ।
जब आप बाज़ार में शॉपिंग कर रहे होते है
तो हो सकता है
कि आपका मन
आपके घर में रखे
पैसों की चिंता कर रहा हो
और अगर कही घर पर हो
तो दुकान की चिंता।
हमारा मन हर समय
कुछ न कुछ सोचता रहता है।
जिससे तनाव हों जाता है।
ये कितनी मूर्खता पूर्ण बात है
कि पहले हम पैसे कमाने के लिए तनाव लेते है
और बाद मे
तनाव संबंधी बीमारियों
पर उन पैसों को खर्च करते है।
इसीलिए मानसिक तनाव न ले।
मानसिक तनाव के कारण - मानसिक तनाव का मुख्य कारण है तुलना , दबाव और दिखावा।
मनुष्य अपने हर सुख, दुःख, अमीरी, गरीबी
और यहाँ तक की बीमारी में भी दूसरो से तुलना करता है
यही तुलना मानसिक तनाव को अपनी ओर आकर्षित करता है।
हर व्यक्ति अपने आप में यूनिक होता है
इसीलिए हमें किसी दूसरे से तुलना नहीं करना चाहिए।
अपने पास जितना है
उसी में संतुष्ट रहना चाहिए।
हमें दूसरों को देख कर मोटिवेट तो होना है
लेकिन उनसे निगेटिव जलन की भावना नहीं रखनी है।
दिखावा नहीं करना है।
अपेक्षा- हम अपने जीवन मे दूसरों से बहुत सी अपेक्षाएं रखते हैं
जैसे माँ मुझे अच्छा खाना दे,
पत्नी मुझे प्यार और सम्मान दे
समाज मे मुझे इज्जत मिले मेरा रुतबा हों।
लेकिन जब हमे अपनी अपेक्षा अनुरूप फल नहीं मिलता
तो हमें मानसिक तनाव हो जाता है।
साथियों हमे किसी से कोई अपेक्षा नहीं करनी चाहिए
सिर्फ अपने कर्म पर फोकस करना चाहिए।
हम सिर्फ अपने को सुधार सकते है दूसरों को नहीं।
डर इसके अलावा हम हर समय डरते है,
गाड़ी चलाते समय,
खाते समय,
लोगो से बात करते समय
और यहाँ तक कि सोते समय भी।
किसी चीज से डरिये नही
बस अपना कर्म करिये।
गीता मे भगवान श्री कृष्ण ने कहा है
कि कर्म करो फल की चिंता न करो
क्योकि फल किसी और शक्ति पर निर्भर है।
इसी लिए अपने मन से डर को तो बिलकुल ही निकाल फेंकिए।
आपका डर हीं आपका सबसे बड़ा शत्रु है।
इमोशन कंट्रोल- टीवी पर अक ऐड आता है डर सभी को लगता है बात बिल्कुल सही है किसी भी भावना का पहले ९० सेकंड हमारे कंट्रोल में नहीं होता यह सभी को आता है लेकिन ९० सेकंड के बाद की भावना को हम नियंत्रित कर सकते है ।
अब हम मन को नियंत्रित करने के उपायों पर बात करते है।
सबसे ज्यादा असरदार उपाय है मेडिटेशन
मेडिटेशन - ८ घंटे की नींद लेने के बाद
सुबह जितना हो सके जल्दी उठे।
नित्य क्रिया से निर्वत होने के बाद
आसान लगा कर बैठ जाइए
आँखे बंद कर ध्यान लगाइये,
जब हम आँखे बंद करके ध्यान लगाएंगे
तब आपका मन चंचल होने के कारण
आपके मस्तिष्क मे कई तरह के विचार आयेंगे।
लेकिन जैसे जैसे आप अभ्यास करेंगे
तो धीरे धीरे वो विचार खत्म भी हो जायेंगे।
फिर मिलेगी असीम शांति और संतुष्टि।
ये सब कुछ एक दिन मे नही होगा
लेकिन एक दिन जरूर होगा।
ऐसा मेरे साथ भी हुआ था
इसीलिए आपके साथ भी ऐसा ही होगा।
बस सच्चे मन से मेडिटेशन कीजिए।
व्यस्त रहे - इसके अलावा अपने आप को व्यस्त रखे
इससे आपका मन नियंत्रित रहेगा।
अपना खाली समय
दूसरे कार्य मे लगाए
कुछ भी करे
जैसे राइटिंग, रीडिंग, डांसिंग
जो भी कुछ मन करे। करे
मन को नियंत्रित करने के लिए
मैंने रीडिंग को चुना था
इसके लिए मैंने हजारों पुस्तके पढ़ी
और आज मैं अपना वही ज्ञान
और उनसे मिला अनुभव आपसे शेयर कर रहा हू।
Log sochte hain…
Peace tab milegi jab problems khatam hongi.
Lekin sach ye hai…
Problems kabhi khatam nahi hoti.
bus Reaction control hota hai.
jo problems samne aaye use do category me baten
control ya un control
agar problem aapke control me hai to
use solve kijiye
faltu me tension na lijiye
agar problem aapke control ke bahar hai
to fir aap tension le kar kya kar sakate hai
faltu me tension na le
आपको एक और कहानी सुनाता हूं
एक गांव से एक महात्मा गुजर रहे थे
उन्होंने देखा कि एक गरीब किसान बहुत चिंतित है
महात्मा ने उससे उसकी चिंता का कारण पूछा
गरीब किसान ने बताया
कि उसका सारा अनाज अभी खेतों में पड़ा है
और आसमान में बादल छा गए है
उसे अब समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करे।
महात्मा ने मुस्कुराते हुए उस किसान से पूछा
क्या तुम बादल को हटा सकते हो
किसान ने कहा नहीं महात्मा ये मेरे बस में नहीं है
तब जो तुम्हारे बस में है वही काम करो
महात्मा ने किसान से कहा
और अपने मार्ग में आगे बढ़ गए
किसान महात्मा की बात समझ गया
बरसात तो हुई लेकिन उससे पहले ही
किसान अपना सारा अनाज खेतों से घर ले जा चुका था।
सिर्फ उसी पर फोकस करे जो आपके कंट्रोल में है
अपने आप को हर परिस्थिति में संतुष्ट और शांत रखे
जिससे आपकी जीवन यात्रा सुगम और सुखमय हो जाएगी।
स्टूडेंट्स से कहा कि वो सबको एक वीडियो दिखाएंगें और वो कहते हैं कि उस वीडियो को देखने के बाद हर कोई अपना रिस्पॉन्स दे। वीडियो में सभी स्टूडेंट्स समुंदर में उठती हुई तेज लहरें देखते हैं, साथ ही घने काले बादल और कड़कती हुई बिजली। उनको एक पानी का जहाज़ आता हुआ दिखता है और वो जहाज़ हवा और पानी के बीच से गुज़रता हुआ दिखता है। थोड़े समय बाद वो जहाज डूब जाता है। प्रोफेसर यहाँ पर वीडियो को रोक देते हैं और अपने स्टूडेंट्स से पूछते हैं की वीडियो में उन्होंने क्या देखा? कुछ स्टूडेंट्स ने कहा की तेज हवा की वज़ह से जहाज डूब गया वहीं कुछ लोगों ने तेज लहरों को इसका जिम्मेदार ठहराया। प्रोफेसर ने कहा कि हर कोई सही है कि जहाज़ डूबा लेकिन वो इसलिए क्योंकि वो पानी से भर गया था। इसी तरह आपकी आस पास भी ऐसी ही परिस्थितियां होंगीं लेकिन आपका जहाज़ भी वहीं डूबेगा जहाँ इसमें पानी भर जाएगा। आपके जहाज़ का पानी निगेटिव थॉट्स हैं और ये अगर आपके दिमाग में जगह बनाने लगे तो आपको आगे बढ़ने से रोकेंगे।